Corona News: दिल्ली में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण से मौत का मामला सामने आया है।
Corona News: दिल्ली में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण (Corona Infection) से मौत का मामला सामने आया है। 22 साल की एक युवती (Maiden) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। युवती पहले से ही कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थी और इलाज के दौरान संक्रमण के कारण उसकी हालत और बिगड़ गई। बीते 24 घंटे में युवती की कोरोना (Corona ) से मौत हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) के अनुसार, देश में कोविड-19 के सक्रिय मामले बढ़कर 4026 हो गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…

स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) के मुताबिक, मृतक युवती को पोस्ट-ट्यूबरकुलोसिस फेफड़ों की बीमारी थी और साथ ही द्विपक्षीय निचली श्वसन नली में संक्रमण भी था। पहले से गंभीर स्थिति के चलते कोरोना संक्रमण ने उसके हालात और बिगाड़ दिए।
दिल्ली में अब तक 4 मौतें
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से अब तक दिल्ली में कोरोना से चार मरीजों की मौत हो चुकी है। इसी अवधि में दिल्ली में कुल 483 कोरोना मरीज सामने आए हैं। रविवार को 47 नए संक्रमितों की पहचान हुई, जबकि अब तक कुल 439 मरीज ठीक हो चुके हैं। रविवार को ही 82 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दी गई।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कोविड वार्ड के नोडल अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने कहा कि कोरोना मरीजों के लिए अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था की गई है। वर्तमान में वार्ड में 9 बेड की सुविधा है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में अब तक चार मरीजों को भर्ती किया गया था, जो पहले से किसी अन्य बीमारी का इलाज करवा रहे थे। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद छुट्टी दे दी गई। फिलहाल अस्पताल में कोई भी कोरोना मरीज भर्ती नहीं है।
राजधानी के अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग (Delhi Health Department) का कहना है कि सभी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए जरूरी संसाधन मुहैया कराए गए हैं। विभाग ने कहा है कि मरीजों को डरने की जरूरत नहीं है। निजी अस्पतालों का भी सहयोग लिया जा रहा है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार तैयार है। अस्पतालों में बिस्तरों से लेकर दवाओं और उपकरणों तक की पूरी व्यवस्था की गई है।
किन राज्यों में कितने केस?
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में देश 19 राज्यों में कोविड-19 के कुल 203 नए मामले सामने आए हैं। इसमें आंध्र प्रदेश में 7, बिहार में 3, छत्तीसगढ़ में 1, दिल्ली में 47, गुजरात में 18, हरियाणा में 2, जम्मू-कश्मीर में 3, झारखंड में 5, कर्नाटक में 15, केरल में 35, मध्य प्रदेश में 4, महाराष्ट्र में 21, ओडिशा में 3, पुडुचेरी में 7, सिक्किम में 1, तमिलनाडु में 10, उत्तर प्रदेश में 8 और पश्चिम बंगाल में कुल 44 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं, पिछले 24 में दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक मरीजों में मौत हुई है।

कोरोना के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों ने कहा है कि भले ही कोरोना का नया वेरिएंट हल्का हो, लेकिन लक्षण नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। खांसी, जुकाम, बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसे मामूली लक्षण भी कई बार लंबे समय तक परेशान करते हैं। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें और टेस्ट कराएं।
संक्रमित होने पर आइसोलेशन की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण हैं, तो उन्हें आइसोलेट होकर रहना चाहिए, भले ही उनकी इम्यूनिटी मजबूत हो। ऐसा करने से परिवार के बुजुर्गों और अन्य बीमार लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकता है। कोरोना के नए वेरिएंट से सामान्य लोग गंभीर रूप से प्रभावित न भी हों, तो भी वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।
सार्वजनिक जगहों पर मास्क जरूरी
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। इससे आप न सिर्फ खुद को, बल्कि दूसरों को भी सुरक्षित रख सकते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि यदि संक्रमण किसी बुजुर्ग या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति तक पहुंचता है, तो वह उनके लिए घातक हो सकता है।
सांस के मरीज रहें सतर्क
वल्लभभाई पटेल चेस्ट अस्पताल के निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा कि फेफड़ों की समस्या से पीड़ित मरीजों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। कोविड मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऐसे में अस्थमा या अन्य सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को कोविड नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। बाहर जाते समय मास्क पहनना और बार-बार हाथ धोना बेहद जरूरी है।
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बुजुर्ग और गंभीर मरीज रखें विशेष ध्यान
नेशनल मेडिकल फोरम और दिल्ली अस्पताल फोरम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल ने कहा कि कोविड का नया वेरिएंट भले ही हल्का हो, लेकिन यह कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और इलाज भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
