Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा वन आश्रित परिवारों और तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। “वन है तो जीवन है, तेन्दूपत्ता है तो रोजगार है” के संदेश के साथ सरकार ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Kedar Kashyap के निर्देशानुसार संचालित इन योजनाओं का उद्देश्य वन आश्रित लोगों को रोजगार, शिक्षा, बीमा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
तेन्दूपत्ता संग्रहण बना आय का बड़ा स्रोत
शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर 5.50 रुपये प्रति गड्डी तय की है। इसके अनुसार:
- 100 गड्डियों पर 550 रुपये भुगतान
- प्रति मानक बोरा 5550 रुपये भुगतान
इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को रोजगार और नियमित आय का साधन मिल रहा है।
लघु वनोपजों की खरीदी से आर्थिक मजबूती
न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत सालबीज, महुआ, इमली, कोदो और माहुल पत्ता जैसी लघु वनोपजों की खरीदी निर्धारित दरों पर की जा रही है।
इस पहल से:
- वन आश्रित परिवारों को उचित मूल्य मिल रहा है
- बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है
बीमा योजनाओं से मिल रही सुरक्षा
राजमोहनी देवी बीमा योजना
इस योजना के तहत तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों को:
- सामान्य मृत्यु पर सहायता
- दुर्घटना जनित मृत्यु पर आर्थिक मदद
- विकलांगता की स्थिति में सहायता राशि
प्रदान की जा रही है।
समूह बीमा योजना
समूह बीमा योजना के माध्यम से परिवार के अन्य सदस्यों को भी आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बन रही है।
बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति
तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
- 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन
- व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए आर्थिक सहायता
- प्रतिभाशाली छात्रों के लिए विशेष शिक्षा प्रोत्साहन योजना
इन योजनाओं से बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
चरण पादुका योजना से राहत
वन क्षेत्रों में काम करने वाले तेन्दूपत्ता संग्राहकों को हर वर्ष चरण पादुका उपलब्ध कराई जाती है, ताकि उन्हें जंगलों में काम करने के दौरान सुविधा मिल सके।
करोड़ों रुपये की सहायता राशि वितरित
वन विभाग के अनुसार:
- अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2025 तक राजमोहनी देवी बीमा योजना के तहत 33 हितग्राहियों को 34.70 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई
- समूह बीमा योजना के तहत 18 मामलों में 2.16 लाख रुपये का भुगतान किया गया
- छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई
“सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, सम्मानजनक जीवन देना लक्ष्य”
Prabhakar Khalko ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि वन आश्रित परिवारों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग की योजनाएं हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
