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Delhi Blast: उबर ड्राइवर, दुकानदार, कंडक्टर, कौन थे दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए लोग?

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Delhi Blast: दिल्ली में सोमवार शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया।

Delhi Blast: दिल्ली में सोमवार शाम लाल किला (Red Fort) मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया। ट्रैफिक सिग्नल (Traffic Signal) पर धीमी गति से चल रही एक कार में धमाका हुआ, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। कई वाहन जलकर राख हो गए और कुछ शव अब तक पहचाने नहीं जा सके हैं। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों में एक उबर ड्राइवर, एक दुकानदार, एक बस कंडक्टर और दो ई-रिक्शा चालक भी शामिल हैं। इनमें से कई अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। आइए जानते हैं उन लोगों के बारे में जिन्होंने इस विस्फोट में अपनी जान गंवाई।

पंकज साहनी- उबर ड्राइवर, दिल्ली निवासी

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22 साल के पंकज साहनी दिल्ली के कंझावला इलाके में रहते थे और उबर कैब चलाकर परिवार का गुज़ारा करते थे। सोमवार शाम वह अपने एक पड़ोसी को लाल किले के पास छोड़ने जा रहे थे, तभी धमाका हुआ। पंकज के साले निकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने पूरी रात पंकज को ढूंढने में बिता दी। सोशल मीडिया पर आई एक फोटो में कार की नंबर प्लेट देखकर उन्होंने पहचाना कि वह पंकज की ही गाड़ी थी। पंकज के परिवार में उनकी दो बहनें और एक छोटा भाई है। वे परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। उनका परिवार मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है।

दिनेश मिश्रा- दुकानदार, दिल्ली निवासी

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32 साल के दिनेश मिश्रा चांदनी चौक में साड़ी और लहंगे की दुकान में काम करते थे। धमाका जब हुआ, वह दुकान पर ही मौजूद थे। उनके रिश्तेदार राज त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने पूरी रात अस्पतालों और पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अगली सुबह पता चला कि दिनेश अब नहीं रहे। मिश्रा के दो छोटे बच्चे हैं- एक बेटा और एक बेटी। वह पिछले 10 साल से उसी दुकान में काम कर रहे थे और अपने परिवार की जरूरतों को मेहनत से पूरा कर रहे थे। उनका पार्थिव शरीर अब उनके पैतृक गांव श्रावस्ती (उत्तर प्रदेश) ले जाया गया है।

अशोक कुमार- डीटीसी बस कंडक्टर, अमरोहा निवासी

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अशोक कुमार, उम्र 34 वर्ष, दिल्ली में डीटीसी क्लस्टर बस के कंडक्टर के तौर पर काम करते थे। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के रहने वाले थे। अशोक के भाई विजय कुमार ने कहा कि उन्हें अशोक की मौत की जानकारी तब मिली जब पुलिस ने घर आकर कहा कि उनके पास अशोक का बस आईडी कार्ड मिला है। अशोक के परिवार में तीन छोटे बच्चे हैं- दो बेटियां (5 और 6 साल) और एक बेटा (3 साल)। वे न केवल अपने परिवार का खर्च उठाते थे बल्कि अपने भाई के बच्चों की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे।

नोमान- कॉस्मेटिक दुकानदार, शामली निवासी

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नोमान, उम्र 23 साल, उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले थे। वे अपने कस्बे में एक कॉस्मेटिक दुकान चलाते थे और दिल्ली सामान लेने आए थे। धमाके में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। नोमान के चचेरे भाई सोनू ने कहा कि नोमान अपने परिवार के अकेले कमाने वाले थे। उनके बड़े भाई बीमार हैं और काम नहीं कर पाते। परिवार अब गहरे सदमे में है।

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लोकेश अग्रवाल- उर्वरक व्यापारी, अमरोहा निवासी

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लोकेश अग्रवाल अमरोहा में खाद का कारोबार करते थे। सोमवार को वे दिल्ली अपने रिश्तेदार से मिलने आए थे, जो सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे। लोकेश के भाई सोनू अग्रवाल ने कहा कि मुलाकात के बाद लोकेश लाल किला पहुंचे और अपने दोस्त अशोक कुमार को मिलने के लिए फोन किया। कुछ ही देर बाद विस्फोट हुआ और लोकेश की मौत हो गई। उनके पिता ओम प्रकाश अग्रवाल ने कहा, ‘वह मेरा सबसे बड़ा बेटा था। यह एक आतंकवादी हमला है। हम चाहते हैं कि सरकार आतंकियों को कड़ी सज़ा दे।’ लोकेश के परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं।

जुम्मन खान- ई-रिक्शा चालक, दिल्ली निवासी

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जुम्मन खान, जो दिल्ली में ई-रिक्शा चलाते थे, सोमवार शाम जब घर नहीं लौटे तो परिवार चिंतित हो गया। उनके मोबाइल का जीपीएस लोकेशन विस्फोट स्थल के पास आखिरी बार दर्ज हुआ था। अगले दिन परिवार ने अस्पताल और शवगृहों में उनकी तलाश की। शाम को जुम्मन का शव मिला – उनका शरीर विस्फोट में बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था। जुम्मन के तीन छोटे बच्चे हैं (उम्र 11, 8 और 7 साल) और उनकी पत्नी दिव्यांग हैं। परिवार अब पूरी तरह बेसहारा हो गया है।

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मोहसिन- ई-रिक्शा चालक, मेरठ निवासी

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मोहसिन, मेरठ के अंसार ब्लॉक के निवासी, सोमवार को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास ई-रिक्शा चला रहे थे। धमाके के बाद वे घर नहीं लौटे। उनकी बहन और जीजा नाज़िम ने उन्हें अस्पतालों में ढूंढा, जहां डॉक्टरों ने कहा कि मोहसिन की मौत हो चुकी है। मोहसिन अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। परिवार का कहना है कि ‘वह मेहनती और खुशमिजाज इंसान थे, जिनके जाने से घर की रौनक चली गई।’

अब तक 12 लोगों की मौत, जांच जारी

इस भीषण विस्फोट में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और 29 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें से पांच की हालत नाज़ुक बनी हुई है। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास खड़ी कई गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। इस बीच सुरक्षा एजेंसियां लगातार CCTV फुटेज खंगाल रही हैं।

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क्या गलती से हुआ विस्फोट या था यह आतंकी हमला?

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह विस्फोट कार में लगे किसी उपकरण की गलती से हुआ या यह आतंकी साजिश थी। फोरेंसिक जांच में पाया गया है कि इसमें उच्च-तीव्रता वाला विस्फोटक इस्तेमाल हुआ था। अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस ने छापेमारी कर उमर-उन-नबी के तीन परिजनों समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पिछले पांच दिनों से राज्यभर में दर्जनों घरों पर छापेमारी चल रही है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली सहित देशभर में अलर्ट जारी कर दिया है और जांच तेजी से जारी है।