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Meta: मेटा के AI चीफ ने 13 साल के बच्चों को क्या सलाह दी?

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Meta: आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में तेजी से प्रवेश कर रही है।

Meta: दुनिया तेजी से एआई (AI) के युग में प्रवेश कर रही है। ऐसे में अगर बच्चे अभी से इस तकनीक को समझना शुरू करें, तो उनका भविष्य बेहद उज्जवल हो सकता है। यही संदेश Meta के चीफ AI ऑफिसर एलेक्जेंडर वांग (Alexandr Wang) ने दिया है। 28 साल के इस युवा अधिकारी ने 13 साल के बच्चों को भविष्य में सफल होने का मंत्र बताया है। पढ़िए पूरी खबर…

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आपको बता दें कि एक पॉडकास्ट शो में बातचीत के दौरान वांग ने कहा कि मौजूदा दौर वैसा ही है जैसा 1980 के दशक में कंप्यूटर के आगमन पर था। उस समय जो लोग कंप्यूटर के साथ ज्यादा समय बिताते थे- जैसे बिल गेट्स और मार्क ज़ुकेरबर्ग, उन्होंने आगे चलकर बड़ी सफलता हासिल की। वांग के अनुसार, आज वही मौका AI टेक्नोलॉजी के साथ है। जो बच्चे आज से ही इसे सीखना शुरू करेंगे, उन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक फायदा मिलेगा।

13 साल के बच्चों को मिली खास सलाह

एलेक्जेंडर वांग (Alexandr Wang) ने कहा, ‘अगर आप 13 साल के हैं, तो आपको अपना पूरा समय कोडिंग में लगाना चाहिए। यह आपकी जिंदगी जीने का तरीका होना चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई बच्चा या युवा आने वाले कुछ सालों में AI टूल्स के साथ 10 हजार घंटे तक प्रयोग करता है, तो वह दूसरों से काफी आगे निकल सकता है। वांग ने इस समय को ‘असाधारण बदलाव का दौर’ कहा, जहां नई तकनीक को जल्दी अपनाने वाले युवाओं को भविष्य में बड़ी सफलता मिलने की संभावना है।

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क्या है ‘वाइब कोडिंग’?

वांग ने युवाओं को AI टूल्स के साथ ‘वाइब कोडिंग’ (Vibe Coding) सीखने की भी सलाह दी। यह एक नई तकनीक है, जिसमें डेवलपर्स को पारंपरिक कोडिंग की जगह नेचुरल लैंग्वेज प्रॉम्प्ट्स यानी साधारण भाषा में AI को निर्देश देकर ऐप या वेबसाइट तैयार करने की सुविधा मिलती है।

इस शब्द को OpenAI के को-फाउंडर आंद्रेज कारपथी (Andrej Karpathy) ने दिया था। उनका मानना है कि अब डेवलपर्स को कोडिंग की जटिलता से मुक्त होकर सिर्फ अपने आइडिया पर फोकस करना चाहिए। हाल के वर्षों में यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हुआ है और कई टेक कंपनियां अब अपनी AI टेक्नोलॉजी में वाइब कोडिंग की सुविधा दे रही हैं।

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एलेक्जेंडर वांग की सफलता की कहानी

वांग खुद इस बात का उदाहरण हैं कि एआई कैसे किसी की जिंदगी बदल सकता है। उन्होंने सिर्फ 19 साल की उम्र में अपनी कंपनी ‘Scale AI’ की शुरुआत की थी। यह कंपनी डेटा लेबलिंग और AI ट्रेनिंग के लिए जानी जाती है। केवल 25 साल की उम्र में वांग दुनिया के सबसे युवा सेल्फ-मेड बिलियनेयर बन गए। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर तकनीक को अपनाना जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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Meta का Scale AI में बड़ा निवेश

इस साल की शुरुआत में मार्क ज़ुकेरबर्ग (Mark Zuckerberg) की कंपनी मेटा ने Scale AI में 14.3 बिलियन डॉलर (लगभग 1.19 लाख करोड़ रुपये) का निवेश किया। इस डील के बाद मेटा (Meta) ने कंपनी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की और Scale AI का वैल्यूएशन 29 बिलियन डॉलर (लगभग 2.41 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया।

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AI युग के लिए नई सोच की जरूरत

एलेक्जेंडर वांग (Alexandr Wang) का मानना है कि आने वाले दशक में AI स्किल्स सीखना वही मायने रखेगा जो कभी कंप्यूटर स्किल्स रखते थे। उन्होंने कहा कि जो युवा अभी से AI और कोडिंग को अपनाएंगे, वे न केवल तकनीक में बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान बना सकेंगे।