Uttarakhand News : नड्डा-धामी का अंगदान अभियान, मानव सेवा का दिया बड़ा संदेश

उत्तराखंड
Spread the love

Uttarakhand News : हरिद्वार, 28 जून। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आयोजित दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के तहत राष्ट्रीय संगोष्ठी में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंगदान को मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य बताते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साधकों ने भाग लिया तथा सैकड़ों लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया।

अंगदान से जरूरतमंदों को मिलता है नया जीवन: नड्डा

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अंगदान वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत ढांचा विकसित कर रही है और राज्यों में भी इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनजागरूकता के कारण देश में अंगदान के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।

सनातन परंपरा त्याग और सेवा की प्रेरणा देती है: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महर्षि दधीचि और राजा शिवि के त्याग का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति सेवा, समर्पण और परमार्थ की भावना का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी यदि किसी व्यक्ति का अंग किसी दूसरे को नया जीवन दे सके, तो इससे बड़ा मानव कल्याण का कार्य नहीं हो सकता।

उत्तराखंड में मजबूत होगी अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सरकारी एवं निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। दून मेडिकल कॉलेज में राज्य के पहले सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र के साथ अंग प्रत्यारोपण केंद्र, अंग बैंक और जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दिलाया गया अंगदान का संकल्प

संगोष्ठी में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने यज्ञ को त्याग और लोकमंगल की जीवन पद्धति बताया। कार्यक्रम के अंत में शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उपस्थित लोगों को अंगदान का संकल्प दिलाया। विशेषज्ञों ने अंगदान के वैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।