Chhattisgarh News:छत्तीसगढ़ में क्रिटिकल मिनरल्स अनुसंधान को बढ़ावा, सीएमडीसी और जेएनएआरडीडीसी के बीच हुआ एमओयू

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: रायपुर, 18 जुलाई। छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के अनुसंधान और वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। राज्य सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

खनिज अनुसंधान और मूल्य संवर्धन पर रहेगा जोर

सरकार के मुताबिक, एमओयू के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, खनन, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्रिटिकल मिनरल्स के विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा के योजनाबद्ध और वैज्ञानिक उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार

एमओयू आदान-प्रदान कार्यक्रम में भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ ने अनुसंधान आधारित खनिज विकास और संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल दिया। वहीं भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने खनिज क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

सीएमडीसी ने पेश की भविष्य की कार्ययोजना

कार्यक्रम में सीएमडीसी के अधिकारियों ने निगम की प्रमुख परियोजनाओं, खनिज विकास से जुड़े कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक और समावेशी उपयोग की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

क्रिटिकल मिनरल्स पर अनुसंधान की जानकारी साझा

जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम और वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की रिकवरी से जुड़े अनुसंधान पर कार्य कर रहा है। उनके अनुसार, इस तरह के शोध भारत में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

खनिज क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने विश्वास जताया कि सीएमडीसी और जेएनएआरडीडीसी के बीच यह साझेदारी खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग और सतत खनन को बढ़ावा देने में सहायक होगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी योगदान दे सकती है।