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Lung Cancer: भारत में स्मोकिंग ना करने वालों में तेजी से फ़ैल रहा है लंग कैंसर, वजह जान चौंक जाएंगे!

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Lung Cancer: भारत में फेफड़ों के कैंसर (लंग कैंसर) को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।

Lung Cancer: भारत में फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। आमतौर पर इस बीमारी को सिगरेट (Cigarette) और बीड़ी जैसे धूम्रपान उत्पादों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हाल की स्टडीज और डॉक्टरों के मुताबिक बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इस बीमारी (Disease) की चपेट में आ रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। आंकड़ों के अनुसार, देश में लंग कैंसर के करीब 10 से 30 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें मरीजों ने जीवन में कभी तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं किया।

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धूम्रपान न करने वालों में कैंसर के कारण

बेंगलुरु के सम्प्रदा अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. राधेश्याम नाइक (Dr. Radheshyam Naik) ने लंग कैंसर डे पर कहा कि गैर-धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख कारणों में सेकंड हैंड धुआं, लकड़ी या कोयले से खाना पकाने का धुआं, कारखानों से निकलने वाली गैसें, पहले से मौजूद फेफड़ों की बीमारियां और महिलाओं में एस्ट्रोजेन जैसे हार्मोन्स का संपर्क शामिल हैं। विशेष रूप से, 40 साल से अधिक समय तक घर में धूप जलाने वालों में कैंसर का जोखिम चार गुना ज्यादा पाया गया है।

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लंग कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे?

डॉ. राधेश्याम नाइक (Dr. Radheshyam Naik) के अनुसार, पिछले तीन दशकों में दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों में पुरुषों और महिलाओं दोनों में लंग कैंसर के मामले बढ़े हैं। भारत वायु पॉल्यूशन में दुनिया में पांचवें स्थान पर है, और लगभग 75 प्रतिशत आबादी खाना पकाने के लिए लकड़ी, गोबर या कोयले जैसे ठोस ईंधन पर निर्भर है, जिसका धुआं कैंसर का खतरा बढ़ाता है। घरेलू और बाहरी वायु पॉल्यूशन के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता में वृद्धि ने भी इन मामलों को उजागर किया है।

गलत डायग्नोसिस से बढ़ता खतरा

सम्प्रदा अस्पताल के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. विनोद के. रमानी (Dr. Vinod K. Ramani) ने कहा कि भारत में ज्यादातर लंग कैंसर के मामले तब पता चलते हैं, जब बीमारी एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुकी होती है। खांसी, सीने में दर्द और वजन घटना जैसे लक्षण टीबी से मिलते-जुलते होने के कारण कई बार गलत डायग्नोसिस होता है, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।

इलाज और बचाव के उपाय

लंग कैंसर (Lung Cancer) के इलाज में इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड मेडिसिन और सर्जरी के बाद कैंसर की पुनरावृत्ति रोकने के लिए टीके शामिल हैं। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि लंबे समय तक खांसी, थूक में खून या वजन कम होने जैसे लक्षणों पर ध्यान दें। धूम्रपान न करने वालों को भी नियमित स्क्रीनिंग और हर तीन साल में पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन कराना चाहिए।

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पॉल्यूशन से बचाव के लिए सुझाव

सम्प्रदा अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. विश्वजीत पई (Dr. Vishwajit Pai) ने कहा कि पॉल्यूशन से बचने के लिए मास्क का उपयोग करें, जीवाश्म ईंधन और रेडियोधर्मी रेडॉन गैस से बचें, और खाना पकाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल करें। घर की हवा की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही लंग कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।