Shanidev: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नवग्रहों की 120 साल की महादशाएं हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती हैं।
Shanidev: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नवग्रहों की 120 साल की महादशाएं हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती हैं। इनमें सूर्य (6 वर्ष), चंद्रमा (10 वर्ष), मंगल (7 वर्ष), बुध (17 वर्ष), गुरु (16 वर्ष), शुक्र (20 वर्ष), शनि (19 वर्ष), राहु (18 वर्ष) और केतु (7 वर्ष) शामिल हैं। कर्मफल दाता और न्यायाधीश शनि की महादशा 19 साल तक चलती है और इसका प्रभाव कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर करता है। शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं, तुला उनकी उच्च राशि और मेष नीच राशि मानी जाती है।

शनि की महादशा का जीवन पर प्रभाव
शनि की महादशा का असर व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर करता है। शुभ स्थिति में शनि धन, संपत्ति और मान-सम्मान प्रदान करते हैं, जबकि नकारात्मक स्थिति में आर्थिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
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कुंडली में शनि नकारात्मक हो तो आती हैं मुश्किलें
यदि कुंडली में शनि नीच या नकारात्मक स्थिति में हैं, तो 19 साल की महादशा में व्यक्ति को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। धन की कमी, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याएं आम हैं। झूठे आरोप, जेल की सजा और व्यापार में नुकसान जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यदि शनि राहु के साथ हों, तो आकस्मिक नुकसान का खतरा रहता है। शनि और चंद्रमा की युति से बनने वाला विष योग मानसिक रोगों का कारण बन सकता है।
जब शनि हो शुभ, तो मिलता है धन और सफलता
जब शनि कुंडली में शुभ या उच्च स्थिति में होते हैं, तो महादशा व्यक्ति के लिए वरदान साबित होती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, धन और संपत्ति की प्राप्ति होती है। कारोबारियों को व्यापार में विस्तार और सफलता मिलती है, और मेहनत के साथ किस्मत का भी साथ मिलता है। राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में मान-सम्मान प्राप्त होता है। इस दौरान व्यक्ति कड़ी मेहनत के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करता है।
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सावधानी और उपाय
शनि की महादशा के प्रभाव को संतुलित करने के लिए ज्योतिषी सलाह देते हैं कि व्यक्ति को मेहनत और कर्म पर ध्यान देना चाहिए। नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए शनिवार को दान, शनि देव की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी हो सकता है। कुंडली का विश्लेषण कर ज्योतिषी से परामर्श लेना भी फायदेमंद रहता है।
Disclaimer: यहां बताई गई सारी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसकी विषय सामग्री का ख़बरी मीडिया हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता है।
