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UP News: राम मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना: राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया दर्शन और आरती

उत्तरप्रदेश
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UP News: चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर अयोध्या में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का एक भव्य प्रतीक भी बना।

नव संवत्सर पर विशेष पूजा-अर्चना

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जिसे हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है, के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रामलला के चरणों में शीश झुकाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनके साथ आनंदी बेन पटेल और योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। सभी ने विधि-विधान से पूजा कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

यह अवसर अयोध्या के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि नववर्ष और नवरात्रि जैसे शुभ समय में इस तरह का आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा को और बढ़ाने वाला माना जाता है।

श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना का महत्व

श्रीराम यंत्र एक विशेष धार्मिक और ज्यामितीय संरचना है, जिसे वैदिक गणित और आध्यात्मिक सिद्धांतों के आधार पर तैयार किया जाता है। इसे सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है और इसकी स्थापना से मंदिर परिसर में शांति, समृद्धि और दिव्यता का वातावरण बनता है।

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यह यंत्र लगभग दो वर्ष पहले अयोध्या लाया गया था और अब वैदिक मंत्रोच्चार और संतों की उपस्थिति में इसकी विधिवत प्रतिष्ठापना की गई। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान आचार्यों ने नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान किए, जिसके बाद यह शुभ कार्य संपन्न हुआ।

मंदिर परिसर में आध्यात्मिक भव्यता

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। राष्ट्रपति मुर्मु ने मंदिर परिसर का भ्रमण भी किया और वहां की दीवारों पर उकेरी गई सुंदर आकृतियों और शिल्पकला को ध्यानपूर्वक देखा।

मंदिर की वास्तुकला और धार्मिक प्रतीकों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। हर ओर भजन, मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

संतों और आचार्यों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण अवसर पर कई प्रमुख संत और धार्मिक गुरुओं की उपस्थिति रही। वैदिक परंपरा के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच यंत्र की स्थापना की गई, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अनुष्ठान केवल आस्था ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश भी देते हैं।

अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल

राष्ट्रपति के आगमन और इस ऐतिहासिक आयोजन के कारण अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। शहर को सजाया गया था और हर ओर श्रद्धा और उल्लास का वातावरण था। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भी इस आयोजन को बेहद उत्साह के साथ देखा और भाग लिया।

यह आयोजन अयोध्या को एक बार फिर वैश्विक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश

इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। श्रीराम यंत्र की स्थापना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की गहराई और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का भी प्रतीक है।

अयोध्या में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना का यह आयोजन इतिहास के पन्नों में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता, परंपरा और आध्यात्मिक शक्ति का भी जीवंत उदाहरण है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन भारत की समृद्ध विरासत को और मजबूत करने का काम करेंगे।