Noida News: नोएडा के इन सेक्टर्स में फ्लैट बुक कराने वाले हजारों खरीदारों के लिए यह सौदा अब एक दर्दभरा सपना बन गया है।
Noida News: नोएडा के सेक्टर 128, 133 और 134 स्थित जेपी विशटाउन प्रोजेक्ट (JP Wishtown Project) का घर खरीदने का सपना सैकड़ों खरीदारों (Buyers) के लिए अब एक बुरे सपने में तब्दील हो चुका है। फ्लैट बुक (Flat Book) करने के 13 से 17 साल बाद भी हजारों खरीदार अब तक अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। इन लोगों को किराए के मकानों में रहने और साथ ही हर महीने ईएमआई (EMI) चुकाने के दोहरे बोझ से गुजरना पड़ रहा है। पढ़िए पूरी खबर…

Gardel Isle और Klassic In प्रोजेक्टों में खरीदारों की हालत बदतर
आपको बता दें कि सेक्टर 133 स्थित Gardel Isles और सेक्टर 134 के क्लासिक इन में रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई इन घरों में लगा दी, लेकिन उन्हें अब भी पजेशन नहीं मिला है। Gardel Isles प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने वाले सुरेंद्र सहगल ने कहा, ‘मैंने 2012 में फ्लैट बुक किया था। बिल्डर ने 80% पेमेंट के साथ-साथ IDC, EDC और पार्किंग के चार्ज भी वसूल लिए, लेकिन अब तक हम किराए पर रह रहे हैं और ईएमआई भी दे रहे हैं। जब साइट पर जाकर प्रगति देखना चाहते हैं, तो हमें अंदर भी नहीं जाने दिया जाता।’
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13-14 साल से अधूरे प्रोजेक्ट, कोई जवाबदेही नहीं
एक अन्य खरीदार, सचिन अरोड़ा ने कहा, ‘हमें 2012 में बुकिंग के वक्त बताया गया था कि चार साल में फ्लैट मिल जाएगा। लेकिन 2016 में पता चला कि कंपनी NCLT में चली गई है और निर्माण कार्य ठप हो गया। अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। हाल के महीनों में कुछ मजदूर लगाए गए हैं, ताकि ऐसा लगे कि काम चल रहा है, लेकिन खरीदार अब थक चुके हैं।’
करीब 3,400 खरीदारों का पैसा Gardel Isles प्रोजेक्ट में फंसा हुआ है। खरीदारों का आरोप है कि काम की रफ्तार बेहद धीमी है और वे अपनी संपत्ति की असल स्थिति तक नहीं देख सकते। कागजों पर एक तस्वीर दिखाई जाती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है।
ग्रीन एरिया के वादे भी अधूरे
खरीदार निशांत भार्गव का कहना है कि जेपी समूह ने नोएडा अथॉरिटी के नियमों का पालन नहीं किया। ‘सेक्टर 133, 134 और 131 में ग्रीन एरिया बेहद कम है। जहां नियमानुसार 152 एकड़ ग्रीन एरिया होना चाहिए था, उसमें से 102 एकड़ सिर्फ गोल्फ कोर्स (सेक्टर 128) को दे दिया गया। अन्य सेक्टरों में हरा क्षेत्र 1-6% ही है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘सेक्टर 133 में खेल मैदान की जगह बिल्डर ने 2,000 से ज्यादा मजदूरों की अस्थायी कॉलोनी बना दी है। इतना ही नहीं, गोल्फ कोर्स का उपयोग करने के लिए निवासियों को 22 लाख रुपये की सदस्यता लेनी पड़ती है, जबकि यह ग्रीन एरिया आम नागरिकों के लिए होना चाहिए था।’

जिन्हें पजेशन मिला, वो भी हैं परेशान
कुछ खरीदारों को पजेशन जरूर मिला है, लेकिन वे भी बदहाल व्यवस्थाओं से परेशान हैं। मनिकेश तिवारी ने कहा, ‘बिल्डर ने हाल ही में पत्र भेजा है कि सोसायटी में जो कुछ टूटेगा या गिरेगा, उसका रखरखाव अब वो नहीं करेंगे। जबकि यूपी अपार्टमेंट अधिनियम के तहत बिल्डर को हैंडओवर के दो साल बाद तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निभानी होती है। आधे टावर तो अभी तक पूरे भी नहीं हुए हैं।’
वहीं सेक्टर 133 में बने मंदिर के हालात भी खराब हैं। केवल बाहरी ढांचा बना है और अंदर ताला लगा हुआ है। खरीदार कहते हैं, ‘जहां भगवान भी नहीं रह पा रहे, वहां हम कैसे रहेंगे?’
क्लासिक इन के निवासी भी बेहाल
सेक्टर 134 की क्लासिक इन सोसाइटी में रहने वाले प्रदीप सहाय ने कहा, ‘हम लगातार शिकायत करते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। करोड़ों रुपये के फ्लैट में मेंटेनेंस नाम की कोई चीज नहीं है।’
जानिए क्या कहता है बिल्डर?
जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक जश पंचमिया ने कहा, ‘जब हमें यह प्रोजेक्ट मिला, तो सबसे बड़ी चुनौती पिछले 15 सालों से अधूरे घरों को पूरा करना था। हमने सभी टावरों के लिए ठेके दे दिए हैं और अब काम कई समूहों में बांटकर तेज किया जा रहा है। 159 टावरों में से 22 को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिल चुका है और 18 अन्य टावरों के लिए आवेदन किया गया है। हमारा लक्ष्य तय समय में सभी खरीदारों को पजेशन देना है।’
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अब खरीदारों की उम्मीदें फिर से जुड़ीं
लेकिन बिल्डर ने भरोसा दिलाया है कि काम को रफ्तार दी गई है और तय समयसीमा में सभी को पजेशन मिलेगा, लेकिन जिन लोगों ने एक दशक से ज्यादा का इंतजार किया है, उनके लिए यह वादा अब सिर्फ एक और आश्वासन जैसा लगता है। खरीदारों की पीड़ा यही कहती है ‘हमने घर का सपना देखा था, अब वह सपना बोझ बन चुका है।’
