Noida Airport तक चलेगी मेट्रो, जानिए क्या होगा रूट
Noida Airport: उत्तर प्रदेश के नोएडा में बन रहे एयरपोर्ट को साल 2025 में शुरू कर दिया जाएगा। नोएडा एयरपोर्ट (Noida Airport) को देश के प्रमुख शहरों से बेहतरीन कनेक्टिविटी देने के लिए तेजी से काम चल रहा है। इसी क्रम में एयरपोर्ट को मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर नई योजना पर विचार किया जा रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (DMRC) की इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI) और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए एयरोसिटी से कालिंदी कुंज (Kalindi Kunj) तक गोल्डन लाइन को जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। गोल्डन लाइन (Golden Line) फिलहाल एयरोसिटी से तुगलकाबाद तक प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि इसके कालिंदी कुंज से जुड़ने के बाद बॉटनिकल गार्डन (Botanical Garden) तक सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी।
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आपको बता दें कि तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक 5 किलोमीटर का एलिवेटेड ट्रैक होगा। तुगलकाबाद से कालिंदीकुंज को कनेक्ट करने के लिए सरिता विहार, मदनपुर खादर और एक अन्य स्टेशन बनाने की आवश्यकता होगी। डीएमआरसी की तरफ से इस पांच किलोमीटर लंबे ट्रैक के निर्माण के लिए यमुना प्राधिकरण के सामने 953 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही यह भी तर्क दिया गया है कि गोल्डन लाइन और मजेंटा लाइन के कालिंदी कुंज पर जुड़ने से बॉटनिकल गॉर्डन तक कनेक्टिविटी होगी।
एक्वा लाइन विस्तार पर फैसला
इसी के साथ ही एक्वा लाइन को भी सेक्टर 142 से बॉटनिकल गार्डन (Botanical Garden) तक कनेक्ट करने का फैसला हो चुका है। जिसके कारण भविष्य में यह पांच किलोमीटर का ट्रैक नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली समेत आसपास के लोगों के लिए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट तक आसान कनेक्टिविटी का माध्यम बनेगा। एक्वा लाइन के बॉटनिकल तक कनेक्ट हो जाने से राजधानी दिल्ली से ग्रेटर नोएडा तक की सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। परी चौक से एयरपोर्ट तक ई-बसें और दूसरी सुविधाएं शुरू करने पर जोर है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट या आईजीआई जाने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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जानिए क्या कहते हैं अधिकारी
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के मुताबिक इस प्रस्ताव पर विचार शुरू हो रहा है। जल्द ही इसे शासन स्तर पर पेश किया जाएगा। कम समय में यह लोगों को आईजीआई और नोएडा एयरपोर्ट तक जोड़ने के लिए बेहतर विकल्प होगा। लेकिन दिल्ली में ट्रैक का निर्माण होना है, ऐसे में बजट खर्च करने से पहले सरकार की मंजूरी लेना जरूरी है।
प्राधिकरण के सीईओ ने बताया कि जल्द ही यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। सीईओ का कहना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गाजियाबाद तक को सीधे रैपिड रेल का ट्रैक बनेगा ही। इधर इस रूट पर मेट्रो से दोनों एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी की राह और आसान हो जाएगी।
जान लीजिए पूरी योजना
नोएडा एयरपोर्ट (Noida Airport) को बेहरीन कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना है। जहां नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अगले साल से परिचालन प्रारंभ हो जाएगा। इससे पहले दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के साथ एयरपोर्ट के मेट्रो लिंक में काफी सुधार देखने को मिल सकता है। डीएमआरसी ने गोल्ड लाइन को कालिंदी कुंज तक विस्तारित करके एयरोसिटी से सीधा कनेक्ट करने की तैयारी की है । वहां से इंटरचेंज के बाद टर्मिनल 3 तक प्रस्तावित किया गया है। गोल्डन लाइन निर्माण के अंतिम चरण में है। यह एयरोसिटी और तुगलकाबाद को जोड़ती है।
तुगलकाबाद से 5 किलोमीटर का विस्तार करके गोल्डन लाइन ट्रेनों को कालिंदी कुंज तक लेकर आया जा सकता है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है और इस योजना के लिए धनराशि मिल जाती है तो तो यमुना के उस पार कालिंदी कुंज और बॉटनिकल गार्डन शहर के मेट्रो ग्रिड के केंद्र बिंदु बन जाएंगे। इस योजना की अनुमानित लागत करीब 950 करोड़ रुपये है।
पारित हो चुका है प्रस्ताव
नोएडा के दोनों स्थानों पर मैजेंटा लाइन स्टेशन हैं। बॉटनिकल गार्डन पहले से ही ब्लू और मैजेंटा लाइनों के लिए एक प्रमुख इंटरचेंज स्टेशन के रूप में काम कर रहा है। वहीं, सेक्टर-142 से शुरू होने वाले नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन के 11 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे लेग के बनने के बाद यह एक ट्राइजंक्शन बन जाएगा। इस विषय में प्रस्ताव पारित हो चुका है और केंद्र से मंजूरी मिलने का इंतजार है। मैजेंटा लाइन सीधे आईजीआई के टर्मिनल-1 तक जाती है। टी1 स्टेशन से एक वॉकवे एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के टी1 स्टेशन से जुड़ता है।
इसलिए, यह पहले से ही शहर को दोनों टर्मिनलों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कनेक्टिविटी प्रदान करता है। प्रस्तावित गोल्ड लाइन विस्तार आईजीआई एयरपोर्ट के लिए दूसरा मेट्रो रूट खोलेगा। इसके साथ ही बॉटनिकल गार्डन के माध्यम से ब्लू लाइन तक पहुंच भी होगी। इस प्रस्ताव पर स्टडी गंभीरता के साथ किया जा रहा है।
इसके कारण से एक्वा लाइन के एक्सप्रेसवे लेग के साथ मिलकर यह मेट्रो ग्रिड को ग्रेटर नोएडा में परी चौक तक बढ़ाएगा। नोएडा में एनसीआर के दूसरे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से बड़े पैमाने पर परिवहन की कमी को कुछ हद तक पूरा करेगा। परी चौक और जेवर 40 किलोमीटर दूर हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने पिछले सप्ताह घोषणा की कि वह अपनी टैक्सी सेवा शुरू करेगा। नोएडा नए एयरपोर्ट को बस से दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों से जोड़ने की संभावना भी तलाश रहा है।
नमो भारत से कनेक्ट करने की भी है योजना
नोएडा एयरपोर्ट को एनसीआर के दूसरे शहरों से कनेक्ट करने के लिए अन्य प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। दिल्ली-मेरठ नमो भारत लाइन से रैपिड रेल कॉरिडोर बनाना लॉन्ग टर्म प्लानिंग का हिस्सा हैं, इन पर काम हो रहा है। डीएमआरसी का प्रस्ताव तब आया है, जब यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वाईईआईडीए) के सीईओ अरुणवीर सिंह ने नोएडा एक्सप्रेसवे के साथ नोएडा एयरपोर्ट और आईजीआई के बीच मेट्रो रेल कनेक्टिविटी के विकल्पों पर डीएमआरसी अधिकारियों के साथ बातचीत की।
प्रारंभ में डीएमआरसी ने एक्सप्रेसवे के जरिए से एनआईए को आईजीआई एयरपोर्ट से कनेक्ट के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की थी। हालांकि, यूपी सरकार की तरफ से रैपिड रेल विकल्प पर विचार करने के बाद इस प्रस्ताव को कैंसिल कर दिया गया। गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और नोएडा एयरपोर्ट को कनेक्ट करने वाला 72 किलोमीटर का कॉरिडोर तैयार करने की योजना है। इसे आर्थिक रूप से भी बेहतर और बड़ी आबादी को सर्विस देने में सक्षम माना गया है।
अब आया कॉरिडोर का प्रस्ताव
डीएमआरसी के मुख्य परियोजना प्रबंधक शिव ओम द्विवेदी ने बातचीत के बाद 13 दिसंबर को सीईओ को खत लिखकर 5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड गोल्ड लाइन कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया। यह आगे चलकर परी चौक के साथ कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा। डीएमआरसी ने इस विस्तार पर सरिता विहार डिपो और मदनपुर खादर में दो मेट्रो स्टेशन बनाने का सुझाव दिया है। अरुणवीर सिंह के मुताबिक प्रस्ताव को मंजूरी के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
सीईओ ने कहा कि इस परियोजना का भविष्य सीएम योगी आदित्यनाथ के स्तर पर प्रस्ताव की समीक्षा और इसके लिए फंड जुटाने के तरीके पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि रैपिड रेल को चालू होने में पांच साल से अधिक का समय लग सकता है, लेकिन यह मेट्रो परियोजना तीन साल के भीतर आईजीआई और परी चौक के बीच कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।
