Khatu Shyam: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर के भक्तों के लिए जरूरी खबर है।
Khatu Shyam: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर (Khatu Shyam Temple) के भक्तों के लिए जरूरी खबर है। बता दें कि मंदिर के दरवाजे 42 घंटे के लिए बंद रहेंगे। श्री श्याम मंदिर कमेटी के अनुसार, भक्तों को इतने सितंबर को बाबा श्याम (Baba Shyam) के दर्शन नहीं मिल पाएंगे। इस अवधि में मंदिर के पट बंद रहेंगे और कमेटी ने भक्तों से सहयोग की अपील की है। पढ़िए पूरी खबर…

क्यों बंद रहेंगे मंदिर के द्वार?
मंदिर प्रबंधन समिति के मुताबिक, 7 सितंबर 2025 को पड़ने वाला पूर्ण चंद्रग्रहण मंदिर बंद रहने का मुख्य कारण है। चंद्रग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। इसी क्रम में 6 सितंबर की रात 10 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे, और 8 सितंबर की शाम 5 बजे बाबा श्याम का स्नान व तिलक श्रृंगार होने के बाद ही मंदिर फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
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भक्तों से की गई सहयोग की अपील
श्री श्याम मंदिर कमेटी (Shri Shyam Mandir Committee) ने भक्तों से अपील की है कि वे इस अवधि में खाटू श्याम जी न आएं और मंदिर की धार्मिक परंपराओं एवं व्यवस्थाओं में सहयोग करें। समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि दर्शन पूरी तरह से 8 सितंबर की शाम के बाद ही शुरू किए जाएंगे।
क्या है इस चंद्रग्रहण की विशेषता?
7 सितंबर 2025 को लगने वाला चंद्रग्रहण साल का दूसरा और अंतिम पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। यह ग्रहण लगभग 82 मिनट तक चलेगा, और इस दौरान चंद्रमा का रंग लाल होकर ‘ब्लड मून’ का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगा। खगोल प्रेमियों के लिए यह एक बेहद रोमांचक और दुर्लभ खगोलीय घटना होगी। इसके अलावा सितंबर माह में कई अन्य खगोलीय घटनाएं भी घटित होंगी, जिससे यह महीना खास माना जा रहा है।
राशियों पर कैसा होगा असर?
ज्योतिषाचार्यों की मानें तो सात सितंबर को आने वाला चंद्रग्रहण भारत के कई राज्यों में देखा जाएगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और यह राशियों पर भी असर डालेगा। ऐसे में लोगों से ग्रहण के शुभ-अशुभ फलों के लिए उपाय करने की भी सलाह ज्योतिषाचार्य देते हैं। यह सलाह हर राशि के अनुसार अलग-अलग होती है।
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जानिए कौन हैं बाबा श्याम?
बाबा श्याम (Baba Shyam), जिन्हें ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है, वास्तव में महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक ही हैं। वे भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। बर्बरीक के पास तीन अद्भुत तीर थे, जिनकी शक्ति से वे अकेले ही युद्ध की दिशा बदल सकते थे। जब वे कौरवों की ओर से युद्ध में सम्मिलित होने जा रहे थे, तब भगवान कृष्ण ब्राह्मण वेश में उनके पास पहुंचे और उनसे शीश दान की मांग की। बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना शीश समर्पित कर दिया। उनकी इस महान दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और हर उस भक्त के सहारा बनेंगे, जो जीवन में हार या कठिनाइयों का सामना कर रहा होगा।
