Online Product: ब्लिंकिट, स्विगी, ज़ेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स हर ऑर्डर में छोटे-छोटे चार्जेज़ जोड़कर हजारों रुपये तक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
Online Product: इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स ने हमारी जिंदगी को जहां एक ओर आसान बना दिया है, वहीं दूसरी ओर ये ऐप्स चुपचाप हमारी जेब पर भारी भी पड़ रहे हैं। ब्लिंकिट (Blinkit), स्विगी, ज़ेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स हर ऑर्डर में छोटे-छोटे चार्जेज़ जोड़कर साल भर में आपके बजट को हजारों रुपये तक नुकसान पहुंचा सकते हैं। हैंडलिंग चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस, सर्ज चार्ज और प्रोडक्ट की बढ़ी कीमतें मिलकर सालाना 10 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च करा रही हैं। ये ऐप्स 5-10 मिनट में डिलीवरी का वादा करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इसके लिए आप कितना अतिरिक्त भुगतान कर रहे हैं? आइए, इस चौंकाने वाली सच्चाई की पूरी रिपोर्ट समझते हैं।

सुविधा का जादू, लेकिन भारी कीमत
इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स ने दूध, ब्रेड, सब्जी से लेकर मसाले तक सब कुछ कुछ ही मिनटों में घर पहुंचाने की सुविधा दी है। ये ऐप्स अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में ब्लिंकिट (Blinkit), स्विगी (Swiggy), ज़ेप्टो (Zepto) पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्कों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मशहूर यूट्यूबर ने कहा कि कैसे ये ऐप्स हैंडलिंग चार्ज, सर्ज फी और प्रोडक्ट की बढ़ी कीमतों के जरिए ग्राहकों की जेब काट रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि 14 महीनों में हैंडलिंग चार्ज 2 से बढ़कर 10 रुपये तक पहुंच गया है।
इन चार्जेस का पूरा गणित समझिए
हर ऑर्डर पर ब्लिंकिट, स्विगी, ज़ेप्टो 5 से 15 रुपये का हैंडलिंग चार्ज वसूलते हैं। इसके अलावा, 2 से 5 रुपये की प्लेटफॉर्म या कन्वीनियंस फीस भी लगाई जाती है। अगर आप महीने में 20 ऑर्डर करते हैं, तो सिर्फ हैंडलिंग चार्ज में 300-400 रुपये और प्लेटफॉर्म फीस में 100 रुपये तक खर्च हो सकता है। सालाना हिसाब करें तो यह राशि 4,000 से 6,000 रुपये तक पहुंच जाती है। ये छोटे-छोटे शुल्क आपके बिल में जुड़कर आपकी बचत को धीरे-धीरे कम कर रहे हैं।

प्राइस सर्ज और रेन फी, मौसम और डिमांड का बोझ
खास मौकों जैसे दिवाली, होली या बारिश के दौरान ये ऐप्स प्राइस सर्ज और रेन फी के नाम पर 10 से 30 रुपये तक अतिरिक्त वसूलते हैं। बारिश या पीक आवर्स में डिलीवरी का खर्च सीधे ग्राहक की जेब पर पड़ता है। इसके अलावा, इन ऐप्स पर प्रोडक्ट्स की कीमतें ऑफलाइन दुकानों से 5-15% ज्यादा होती हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर स्थानीय दुकान में आलू 20 रुपये प्रति किलो है, तो इन ऐप्स पर यह 30-35 रुपये तक हो सकता है। यह प्राइस सर्ज और प्रोडक्ट की बढ़ी कीमतें आपकी लागत को और बढ़ा देती हैं।
ये भी पढ़ेंः Max Hospital: मैक्स हॉस्पिटल में इन 3 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी वालों को नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज
डिस्काउंट का भ्रम- फायदा कम, नुकसान ज्यादा
‘200 रुपये की खरीद पर 50 रुपये ऑफ’ या ‘पहले ऑर्डर पर 60% डिस्काउंट’ जैसे ऑफर्स ग्राहकों को लुभाते हैं, लेकिन इनकी शर्तें इतनी सख्त होती हैं कि फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है। कई बार डिस्काउंट देने से पहले प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ा दी जाती हैं, जिससे ग्राहक को कोई वास्तविक बचत नहीं होती। इसके अलावा, मिनिमम ऑर्डर वैल्यू (MOV) जैसे नियम ग्राहकों को जरूरत से ज्यादा खरीदारी करने के लिए मजबूर करते हैं। उदाहरण के तौर पर, 149 रुपये से ऊपर ऑर्डर पर मुफ्त डिलीवरी का लालच देकर लोग 50 रुपये की जरूरत के लिए 150-200 रुपये का सामान खरीद लेते हैं।
सालाना कितना नुकसान?
मान लीजिए आप महीने में 4,000-5,000 रुपये का सामान ऑर्डर करते हैं। इसमें शामिल हो सकते हैं-
हैंडलिंग चार्ज: 200 रुपये
प्लेटफॉर्म फीस: 60 रुपये
रेन/सर्ज फी: 150 रुपये
प्रोडक्ट की बढ़ी कीमत (8%): 400 रुपये
यह कुल 810 रुपये का अतिरिक्त खर्च बनता है, जो सालाना 9,720 रुपये तक पहुंच सकता है। इतने पैसों में आप एक बजट स्मार्टफोन, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या ढेर सारे कपड़े खरीद सकते हैं। यह राशि दिखाती है कि 5 मिनट की सुविधा आपकी बचत को कैसे खा रही है।
डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर का बोझ ग्राहक पर
इन ऐप्स का डिलीवरी सिस्टम, जिसमें डार्क स्टोर्स, राइडर्स, पेट्रोल और वेतन शामिल हैं, का खर्च अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों पर ही डाला जाता है। हैंडलिंग चार्ज, सर्ज फी और बढ़ी हुई प्रोडक्ट कीमतें इस लागत को कवर करती हैं। इसके अलावा, कुछ मामलों में आईफोन और एंड्रॉइड यूजर्स को अलग-अलग कीमतें दिखाई जाती हैं, जो पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
ये भी पढ़ेंः Adani’s Luxury Jet: अदानी ने खरीदा 1000 करोड़ का प्राइवेट जेट, इंटीरियर 5 स्टार होटल जैसा
जरूरत पर ही ऑर्डर करें
इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स (Instant Delivery Apps) सुविधा तो देते हैं, लेकिन ये आपकी बचत, शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये ऐप्स आपको आलसी बनाने के साथ-साथ सामाजिक रूप से अलग-थलग भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल तभी करें, जब वाकई जरूरी हो, जैसे बीमारी के समय। अन्यथा, स्थानीय दुकानों से खरीदारी करें, जहां प्रोडक्ट सस्ते होते हैं और आप सामाजिक संपर्क भी बनाए रख सकते हैं। इससे न केवल आपकी जेब बचेगी, बल्कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।
