Delhi News: दिल्ली में चल रहे भारत रंग महोत्सव के दौरान 13 फरवरी 2026 को ब्लैंक कैनवस सभागार में मास्क प्लेयर्स आर्ट ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘लाजो’ का प्रभावशाली मंचन हुआ।
यह नाटक प्रसिद्ध कथाकार Rajendra Singh Bedi की कहानी ‘लाजवंती’ पर आधारित है। लेखन और निर्देशन Chandra Shekhar Sharma ने किया है।
बँटवारे की त्रासदी और मानवीय रिश्ते
हम अक्सर भारत-पाकिस्तान बँटवारे को जमीन और जान-माल के नुकसान तक सीमित समझते हैं। लेकिन यह नाटक दिखाता है कि बँटवारे ने सबसे ज्यादा चोट रिश्तों और भावनाओं पर पहुंचाई।
नरसंहार, बलात्कार और बेघर होने की पीड़ा को मंच पर संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। केवल तीन पात्रों के माध्यम से पूरी कहानी को सशक्त तरीके से दिखाया गया, बिना मूल कथा की गहराई खोए।
स्त्री विमर्श की मजबूत आवाज़
‘लाजो’ केवल बँटवारे की कहानी नहीं, बल्कि स्त्री की पीड़ा और समाज की सोच पर सवाल उठाने वाला नाटक भी है।
दंगों के दौरान लाजो को जबरन पाकिस्तान ले जाया जाता है। वह उम्मीद के सहारे जीती है कि एक दिन अपने देश और पति के पास लौटेगी।

लेकिन जब वह वापस आती है, तो उसे घर में जगह तो मिलती है, पर पति के दिल में पहले जैसा अपनापन नहीं मिलता। यही भावनात्मक दूरी इस नाटक की सबसे मार्मिक सच्चाई है।
अभिनय ने छुआ दर्शकों का दिल
लाजो की भूमिका में सरिता राणा ने स्त्री पीड़ा को जीवंत कर दिया। उनके अभिनय में दर्द, उम्मीद और टूटन साफ दिखाई दी।
जमाल के किरदार में रविन्द्र सिंह ने सधा हुआ और प्रभावी अभिनय किया।
निर्देशक चंद्र शेखर शर्मा ने पति की भूमिका निभाते हुए निर्देशन और अभिनय दोनों जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया।
दर्शकों की प्रतिक्रिया और विचार-विमर्श
मुख्य अतिथि प्रोफेसर पूनम वर्मा (प्रिंसिपल, शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज) ने नाटक की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास को समझना युवाओं के लिए जरूरी है।
नाटक के बाद दर्शकों ने अपने विचार साझा किए। आज के समय में भी स्त्री-पुरुष संबंधों में मौजूद मानसिक दूरी और सामाजिक सोच पर खुलकर चर्चा हुई। मंचन के बाद भी लंबे समय तक विचारों का आदान-प्रदान चलता रहा।
