Chhattisgarh News: रायपुर, 1 जून 2026। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले का बड़ेकनेरा गांव आज वन आधारित अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां तेंदूपत्ता संग्रहण, तीखुर प्रसंस्करण, कृषि और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गांव का दौरा कर वन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से मुलाकात की और उनके जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों को करीब से देखा।
मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों, महिला स्व-सहायता समूहों, विद्यार्थियों और किसानों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं को लागू करना नहीं है, बल्कि गांवों में सम्मानजनक आजीविका, आर्थिक सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जब योजनाएं प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचती हैं, तब उनका असर केवल आय तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज के विकास में दिखाई देता है।
तेंदूपत्ता बना परिवारों की आय का मजबूत सहारा
मुख्यमंत्री सबसे पहले तेंदूपत्ता संग्राहक वेदबती यादव के घर पहुंचे। यहां उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत कर उनके जीवन और रोजगार की जानकारी ली। वेदबती यादव ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 3720 गड्डी तेंदूपत्ता संग्रहित किया, जिससे उन्हें 20 हजार 460 रुपये की आय प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण अब उनके परिवार के लिए आय का एक भरोसेमंद साधन बन गया है।
मुख्यमंत्री ने उनके परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि वन संपदा पर आधारित रोजगार ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन उत्पादों के संग्रहण और विपणन को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
तीखुर प्रसंस्करण से महिलाओं को मिला आत्मनिर्भर बनने का अवसर
मुख्यमंत्री ने वन धन विकास केंद्र मर्दापाल से जुड़ी मां शीतला स्व-सहायता समूह की सदस्य विमला भोयर से भी मुलाकात की। विमला ने बताया कि उन्होंने केवल एक महीने में 85 किलोग्राम तीखुर का प्रसंस्करण कर लगभग 85 हजार रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने कहा कि पहले वन उत्पादों का उपयोग सीमित था, लेकिन अब मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के माध्यम से आय के नए अवसर पैदा हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने इसे महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग कर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं।
छात्रवृत्ति योजना से शिक्षा को मिल रहा प्रोत्साहन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राजबती मंडावी से भी बातचीत की। राजबती ने कक्षा 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जिसके लिए उन्हें तेंदूपत्ता हितग्राही छात्रवृत्ति योजना के तहत 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली है।
मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि वन आधारित योजनाएं केवल रोजगार और आय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सपनों को पूरा करने का माध्यम भी बन रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपने गांव व राज्य का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।
खेती, वानिकी और मत्स्य पालन का सफल मॉडल
मुख्यमंत्री ने किसान गौतम यादव द्वारा किए जा रहे कृषि और मत्स्य पालन कार्यों का भी अवलोकन किया। गौतम यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और कृषि उन्नति योजना सहित कई योजनाओं का लाभ मिलने से उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई है। उन्होंने मक्के की खेती के साथ तालाब में मत्स्य पालन को जोड़कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती, वानिकी और मत्स्य पालन का एकीकृत मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। इससे किसानों को सालभर आय के अवसर मिलते हैं और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
बड़ेकनेरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण भी किया। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की अपील करते हुए कहा कि पेड़ केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और समृद्धि का आधार भी बनते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की जरूरत है और हर नागरिक को इसमें अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।
वन विभाग की योजनाओं से मिला बहुआयामी लाभ
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभ भी वितरित किया गया। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत किसानों को हजारों नीलगिरी पौधे दिए गए। तेंदूपत्ता हितग्राही छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। वहीं राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत हितग्राहियों को लाखों रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। वन प्रबंधन समितियों को भी लाभांश राशि प्रदान कर उनकी भागीदारी को मजबूत किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग की योजनाएं ग्रामीण परिवारों की आजीविका, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आत्मविश्वास को मजबूत कर रही हैं। बड़ेकनेरा का यह मॉडल दिखाता है कि वन आधारित अर्थव्यवस्था किस प्रकार आत्मनिर्भर गांवों और समृद्ध समाज के निर्माण की मजबूत नींव बन सकती है।
