Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज, बलौदा-बेलमुंडी में बड़े सर्वे को मंजूरी

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: रायपुर, 27 जून 2026: छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की संभावनाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया है।

यह ड्रिलिंग हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए की जाएगी। इसके आधार पर भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

हीरे के भंडार का होगा वैज्ञानिक आकलन

एनसीएल बोर्ड ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं।

बड़े व्यास की ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरे के भंडार का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार होगी, जिसके आधार पर खनन का अंतिम फैसला लिया जाएगा।

पहले ही मिल चुके हैं प्राकृतिक हीरे

एनसीएल ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के जरिए इस क्षेत्र में किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी।

करीब 200 टन बल्क सैंपल की जांच के दौरान पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे मिले थे। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

बड़े हीरा उत्पादक देशों जैसा दिख रहा संकेत

परियोजना से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी शुरुआती चरण में इसी तरह के संकेत मिले थे, जिनके बाद बड़े हीरा भंडार विकसित हुए।

इसी वजह से बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है।

लौह अयस्क परियोजनाओं की भी हुई समीक्षा

एनसीएल बोर्ड बैठक में बैलाडीला डिपॉजिट-4 और डिपॉजिट-13 सहित अन्य लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे आगे बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना है। वहीं डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है।

पर्यावरण और स्थानीय विकास पर रहेगा फोकस

बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी खनन परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

एनसीएल का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ बन सकता है प्रमुख हीरा उत्पादक राज्य

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना राज्य के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि परियोजना सफल रहती है तो छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।