Greater Noida: ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित देविका गोल्ड होम्स सोसाइटी के निवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब सोसाइटी में फ्लैट रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले से न सिर्फ देविका गोल्ड होम्स बल्कि पूरे गौतम बुद्ध नगर की फंसी हुई सोसाइटियों के लिए एक नई उम्मीद जगी है।
निवासियों की याचिका पर आया ऐतिहासिक फैसला
सोसाइटी निवासी दीपक दुबे के नेतृत्व में निवासियों ने दिसंबर माह में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर को निर्देश दिए कि तीन महीने के भीतर फ्लैटों की रजिस्ट्री सुनिश्चित की जाए।
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पूरा भुगतान करने के बाद भी नहीं हो रही थी रजिस्ट्री
निवासी दीपक दुबे ने बताया कि सभी खरीदार बिल्डर को पूरा भुगतान कर चुके हैं और पिछले छह वर्षों से सोसाइटी में रह रहे हैं। इसके बावजूद न तो रजिस्ट्री हो रही थी और न ही नक्शे और ब्रोशर के अनुसार सभी सुविधाएं मिल पाई थीं।
बिल्डर-प्राधिकरण विवाद में फंसे खरीदार
दीपक दुबे ने सवाल उठाया कि अगर बिल्डर ने प्राधिकरण को पैसा नहीं दिया है तो इसका खामियाजा खरीदार क्यों भुगतें। इसी तरह के बिल्डर और प्राधिकरण के बीच विवाद के कारण गौतम बुद्ध नगर की सैकड़ों सोसाइटी के लाखों फ्लैट खरीदार वर्षों से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं।
हाईकोर्ट का फैसला लाखों खरीदारों के लिए राहत
निवासियों की ओर से उच्च न्यायालय में पैरवी करने वाले अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह ने बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 16 दिसंबर के आदेश के आलोक में दिया गया है। यह एक ऐतिहासिक निर्णय है, जो आने वाले समय में लाखों फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
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नेफोमा ने फैसले को बताया मील का पत्थर
नेफोमा अध्यक्ष अन्नू खान ने कहा कि यह फैसला उन हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए नजीर बनेगा, जो वर्षों से रजिस्ट्री, मालिकाना हक और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने पीड़ित होम बायर्स की पीड़ा को समझते हुए न्याय दिया है।

निवासियों में खुशी और उम्मीद
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद देविका गोल्ड होम्स के निवासियों में खुशी की लहर है। साथ ही, यह फैसला गौतम बुद्ध नगर की अन्य फंसी हुई सोसाइटियों के लिए भी एक मजबूत कानूनी रास्ता दिखाता है।
