Delhi News: दिल्ली सिर्फ इमारतों और सड़कों का शहर नहीं है, बल्कि मेहनतकश लोगों का भी शहर है। निर्माण मजदूर, रिक्शा चालक, सफाईकर्मी, डिलीवरी बॉय और फैक्ट्री वर्कर—ये सभी दिल्ली को चलाते हैं। ऐसे लोगों के लिए दिल्ली सरकार ने एक मानवीय पहल शुरू की है, जिसका नाम है अटल कैंटीन।
इस योजना का मकसद साफ है—दिल्ली में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।
पांच रुपये में सम्मान के साथ भोजन
अटल कैंटीन में सिर्फ 5 रुपये में एक पौष्टिक थाली दी जाती है। इस थाली में रोटी, चावल, दाल, सब्जी और अचार शामिल होता है। थाली का वजन लगभग 600 ग्राम होता है, ताकि मेहनत करने वाले लोगों को भरपूर पोषण मिल सके।
एक थाली की असली लागत करीब 30 रुपये है, जिसमें से 25 रुपये दिल्ली सरकार देती है। 5 रुपये इसलिए लिए जाते हैं ताकि भोजन दान नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ लिया गया अधिकार लगे।
अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित योजना
यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर शुरू की गई है। अटल जी की राजनीति का आधार करुणा, संयम और अंत्योदय था, यानी समाज के आखिरी व्यक्ति का उत्थान।
अटल कैंटीन उसी सोच को आगे बढ़ाती है, जहां सरकार सबसे कमजोर वर्ग के साथ खड़ी नजर आती है।
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Delhi News: रोजाना एक लाख थालियों का लक्ष्य
पहले चरण में दिल्ली के श्रमिक क्षेत्रों, झुग्गी-झोपड़ी इलाकों, औद्योगिक क्षेत्रों और ट्रांसपोर्ट हब के पास 45 अटल कैंटीन शुरू की गई हैं। आने वाले समय में 55 और कैंटीन खोली जाएंगी।
इसके बाद रोजाना करीब 1 लाख थालियां जरूरतमंदों को परोसी जाएंगी।
गुणवत्ता और स्वच्छता पर पूरा ध्यान
अटल कैंटीन में खाना LPG गैस पर पकाया जाता है और RO पानी का इस्तेमाल होता है। ग्राहकों को डिजिटल टोकन दिया जाता है और पूरी व्यवस्था पर CCTV कैमरों से नजर रखी जाती है।
खाने की गुणवत्ता की जांच FSSAI और NABL लैब्स के जरिए कराई जाती है, ताकि हर व्यक्ति को सुरक्षित और अच्छा भोजन मिले।
मजदूर सिर्फ आंकड़ा नहीं, भागीदार हैं
दिल्ली सरकार मानती है कि मजदूर और कामगार सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि शहर की प्रगति के भागीदार हैं। भूखा व्यक्ति न तो स्वस्थ रहता है और न ही बेहतर काम कर पाता है।
इसी सोच के साथ सरकार ने भोजन को सिर्फ कल्याण योजना नहीं, बल्कि शहरी सुरक्षा और उत्पादकता से जोड़ा है।
समाज और संगठनों की भागीदारी
इस पहल में कई सामाजिक संगठन भी जुड़ना चाहते हैं। सरकार ऐसी नीति बना रही है, जिससे उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। साफ है कि सुशासन का मतलब सिर्फ बड़ी इमारतें नहीं, बल्कि कमजोर व्यक्ति को मजबूत बनाना है।
Delhi News: शासन का मानवीय चेहरा
अटल बिहारी वाजपेयी मानते थे कि शासन का चेहरा मानवीय होना चाहिए। उनकी सरकार ने साल 2000 में अंत्योदय अन्न योजना शुरू की थी, ताकि गरीबों को सस्ता अनाज मिल सके।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। यह दिखाता है कि खाद्य सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
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एक थाली, बिना भेदभाव
अटल कैंटीन में किसी से उसका धर्म, जाति या प्रांत नहीं पूछा जाता। बस भूख देखी जाती है। एक साधारण थाली हर किसी की भूख मिटाती है।
किसी को खाना खिलाना लालच नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति है। यही अटल कैंटीन की सबसे बड़ी पहचान है।
