भारत में पुरानी कार या बाइक खरीदना-बेचना अक्सर मुश्किल प्रक्रिया माना जाता है, क्योंकि इसमें RTO के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं और कागजी प्रक्रिया भी लंबी होती है। अब सरकार इस प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है।
नए डिजिटल सिस्टम के तहत पुरानी गाड़ियों की जानकारी और दस्तावेजों की जांच ऑनलाइन वाहन (VAHAN) पोर्टल के जरिए की जाएगी, जिससे वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो सकेगी।
वाहन पोर्टल क्या है
वाहन पोर्टल भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
इस पोर्टल के माध्यम से वाहन से जुड़ी कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जैसे:
- वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी
- RC ट्रांसफर
- टैक्स और चालान की जानकारी
- इंश्योरेंस और फिटनेस स्टेटस
- वाहन मालिक की डिटेल
डिजिटल सिस्टम के कारण अब कई प्रक्रियाएं सीधे ऑनलाइन हो सकती हैं और कागजी काम कम हो जाता है।
15 साल पुरानी गाड़ियों पर क्या नियम हैं
भारत में निजी वाहनों का रजिस्ट्रेशन सामान्यतः 15 साल के लिए वैध माना जाता है।
15 साल पूरे होने के बाद:
- वाहन की फिटनेस टेस्ट करानी होती है
- RC को रिन्यू (Renew) कराना पड़ता है
- कुछ राज्यों में ग्रीन टैक्स भी देना पड़ सकता है
अगर वाहन फिटनेस टेस्ट पास कर लेता है, तो उसकी वैधता कुछ और वर्षों के लिए बढ़ाई जा सकती है।
ऑनलाइन वेरिफिकेशन से क्या फायदा होगा
नई व्यवस्था लागू होने से वाहन खरीदने-बेचने वाले लोगों को कई फायदे मिलेंगे:
1. धोखाधड़ी से बचाव
ऑनलाइन वेरिफिकेशन से यह तुरंत पता चल जाएगा कि वाहन चोरी का है या नहीं और उस पर कोई बकाया चालान या लोन तो नहीं है।
2. RTO के चक्कर कम
पहले वाहन ट्रांसफर के लिए कई बार RTO ऑफिस जाना पड़ता था, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया से समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
3. पूरी जानकारी एक जगह
वाहन से जुड़ी सभी जानकारी जैसे RC, इंश्योरेंस, टैक्स और फिटनेस रिकॉर्ड एक ही पोर्टल पर उपलब्ध होंगे।
4. ट्रांसफर प्रक्रिया तेज
ऑनलाइन सिस्टम से वाहन ट्रांसफर का समय भी कम होगा और प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी।
पुरानी कार खरीदने से पहले ये चीजें जरूर चेक करें
अगर आप सेकेंड-हैंड कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो वाहन पोर्टल पर ये जानकारी जरूर देखें:
- RC की वैधता
- वाहन मालिक की जानकारी
- इंश्योरेंस स्टेटस
- पेंडिंग चालान
- लोन या हाइपोथिकेशन
इससे भविष्य में किसी कानूनी समस्या से बचा जा सकता है।
डिजिटल इंडिया के तहत सरकार वाहन से जुड़ी सेवाओं को भी तेजी से ऑनलाइन कर रही है। वाहन पोर्टल के जरिए पुरानी गाड़ियों की ऑनलाइन वेरिफिकेशन और ट्रांसफर प्रक्रिया आसान होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी।
इस कदम से सेकेंड-हैंड वाहन बाजार अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकता है।
