क्रोहन डिज़ीज़, प्रोडक्ट फेलियर और कई चुनौतियों के बीच कैसे शुरू हुआ INHANSS का सफर
Women’s Day Special : आज के समय में यह सवाल कई महिलाओं के मन में चुपचाप उठता है कि क्या शादी के बाद जीवन की प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं। कई महिलाएँ अपने करियर से ब्रेक लेती हैं, कुछ परिवार पर ध्यान देने लगती हैं, और कुछ अपने जीवन के नए अध्याय को अपनाने की कोशिश करती हैं। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई देता है घर, परिवार और जिम्मेदारियां। लेकिन कई बार मन के भीतर एक सवाल धीरे-धीरे उभरने लगते हैं..क्या मेरी अपनी पहचान अभी भी बाकी है? उद्यमी अमिता रॉय की कहानी भी इसी सवाल से शुरू होती है।

करीब 15 वर्षों तक पेशेवर जीवन में काम करने के बाद उन्होंने अपने निजी जीवन और शादी पर ध्यान देने के लिए नौकरी छोड़ दी। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनके भीतर एक खालीपन सा है। उन्हें लगा कि शायद उन्हें अपने जीवन में एक नई दिशा और पहचान की जरूरत है।
इसी दौरान उन्हें क्रोहन डिज़ीज़ (Crohn’s Disease) नाम की एक ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला। कई बार जीवन की ऐसी चुनौतियाँ व्यक्ति को अपने जीवन को नए नजरिये से देखने के लिए मजबूर कर देती हैं। अमिता के लिए भी यह समय आत्म-चिंतन का दौर बन गया। उन्होंने खुद से एक सवाल पूछा— “अगर मुझे अपनी पहचान फिर से बनानी हो, तो मैं क्या करना चाहूँगी?” यही सोच आगे चलकर एक नई शुरुआत का कारण बनी।

कैसे शुरू हुआ सफर
शुरुआत में अमिता ने प्रेस-ऑन नेल्स के साथ अपना पहला प्रोडक्ट लाइन शुरू करने की कोशिश की। इसके लिए करीब 500 पीस का एक पूरा बैच तैयार करवाया गया। लेकिन जब वह बैच तैयार होकर आया, तो अमिता उससे संतुष्ट नहीं थीं। उन्हें लगा कि उसकी क्वालिटी और फिनिशिंग वैसी नहीं थी जैसी वह अपने ब्रांड के लिए चाहती थीं। उस समय उनके सामने आसान रास्ता यह था कि वह उस बैच को बाजार में बेच देतीं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
अमिता ने उस पूरे बैच को आगे बढ़ाने से मना कर दिया और वहीं से पूरी प्रोडक्ट लाइन बदलने का फैसला लिया। इसके बाद उन्होंने ज्वेलरी की दिशा में काम शुरू किया। शुरुआत में कुछ समय तक उन्होंने ट्रेडिंग मॉडल के जरिए काम किया—यानी बाजार से ज्वेलरी पीस खरीदकर उन्हें बेचने का प्रयास किया। लेकिन वहाँ भी एक समस्या बनी रही। क्वालिटी पर उनका पूरा नियंत्रण नहीं था।

इसी वजह से उन्होंने अपने व्यवसाय के दूसरे वर्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया— मैन्युफैक्चरिंग में प्रवेश करने का। इस फैसले ने उन्हें डिजाइन, क्वालिटी और पूरी प्रक्रिया पर बेहतर नियंत्रण दिया और आगे चलकर यही कदम ब्रांड के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ।
देखते-देखते ब्रांड बन गया INHANSS
आज INHANSS – D2C Brand ज्वेलरी को एक अलग नजरिये से देखने की कोशिश कर रहा है। अमिता का मानना है कि ज्वेलरी को केवल कीमत, अवसर या डिजाइन के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका फोकस इसे इस तरह डिजाइन करने पर है कि महिलाएँ एक ही आउटफिट को अलग-अलग तरीकों से पहन सकें।

उदाहरण के लिए, आपकी अलमारी में रखी वही साड़ी—जिसे शायद आपने सिर्फ किसी खास मौके पर पहना हो—उसे अलग-अलग ज्वेलरी के साथ कई नए तरीकों से स्टाइल किया जा सकता है। कभी सिर्फ स्टेटमेंट इयररिंग्स, कभी नेकलेस, और कभी पूरा सेट। इसी सोच के साथ INHANSS अपने कई डिज़ाइनों को 60 से अधिक रंगों में पेश करता है, ताकि महिलाएँ अपने कपड़ों के साथ अलग-अलग रंगों की ज्वेलरी जोड़कर उसी आउटफिट को बार-बार नए लुक में पहन सकें। इस तरह ज्वेलरी सिर्फ एक एक्सेसरी नहीं रहती, बल्कि रोजमर्रा के स्टाइल को बदलने का एक आसान तरीका बन जाती है।

आज INHANSS की वेबसाइट पर 6,800 से अधिक ऑर्डर प्रोसेस हो चुके हैं। ब्रांड Amazon, Flipkart, JioMart जैसे प्रमुख मार्केटप्लेस पर उपलब्ध है और Myntra पर भी विस्तार की तैयारी चल रही है। अगस्त में Unhu Startup Emporium, Dehradun में ब्रांड का ऑफलाइन स्टोर भी शुरू किया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी INHANSS अब Distacart जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुँच रहा है।

अमिता के लिए यह ब्रांड केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि खुद को फिर से खोजने की यात्रा का हिस्सा है। इसी दौरान अमिता के काम को पहचान भी मिलने लगी। उन्हें फरवरी 2025 में “Fame Achievers Award” से सम्मानित किया गया और दिसंबर 2025 में “Comeback Story of the Year” के लिए भी सम्मान मिला। यह सम्मान उनके लिए सिर्फ उपलब्धियाँ नहीं थे, बल्कि उस यात्रा की पहचान थे जिसमें उन्होंने खुद को फिर से खड़ा किया।
इस Women’s Day पर अमिता रॉय का Simple Message है—
“जीवन रुकता नहीं है। कई बार हमें बस खुद को फिर से बनाने की हिम्मत जुटानी होती है।”
For More Detail Visit: https://www.inhanss.com
