Watch the biggest proof of illegal extortion by IND 24 News Channel!

IND 24 न्यूज चैनल की अवैध उगाही का सबसे बड़ा सबूत देखें!

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IND 24 न्यूज चैनल की कथित अवैध उगाही का दस्तावेज़ सामने आया है, जिसे चैनल के जिला/ब्लॉक संवाददाताओं के लिए जारी नियम एवं शर्त बताया जा रहा है। इस दस्तावेज़ ने चैनल प्रबंधन की कार्यशैली और पत्रकारों से पैसे वसूलने के आरोपों को और पुख्ता कर दिया है।

सामने आए काग़ज़ात के मुताबिक, IND 24 चैनल में जिला और ब्लॉक स्तर के संवाददाताओं से पहले जमा राशि (डिपॉजिट) ली जाती है, जिसे “अप्रतिदेय” बताया गया है। नियमों में साफ लिखा है कि संवाददाता 30 दिनों के भीतर अपने विज्ञापन चैनल पर चलाने के लिए बाध्य होंगे।

दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि जिला स्तर के संवाददाता को हर महीने न्यूनतम 15 हजार रुपये और ब्लॉक स्तर के संवाददाता को 10 हजार रुपये के विज्ञापन लाना अनिवार्य होगा। यानी पत्रकारिता करने से पहले उन्हें चैनल के लिए व्यवसाय लाने का लक्ष्य दिया गया है।

इतना ही नहीं, चैनल पर चलने वाले विज्ञापनों पर संवाददाता को 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन देने की बात कही गई है, वह भी तय लक्ष्य पूरा होने के बाद। विज्ञापन के प्रसारण के तीन दिन के भीतर बिल प्राप्त करना संवाददाता की जिम्मेदारी बताई गई है और 15 दिनों के भीतर भुगतान न होने की स्थिति में संबंधित संवाददाता का FTP बंद करने की चेतावनी भी दस्तावेज़ में दर्ज है।

सबसे गंभीर बात यह है कि विज्ञापन भुगतान के लिए सीधे चैनल के बैंक खाते में राशि जमा कराने का उल्लेख है, जिससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या संवाददाताओं को वेतनभोगी पत्रकार की बजाय रिकवरी एजेंट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।

यह दस्तावेज़ ऐसे समय सामने आया है जब IND 24 चैनल की यूपी स्टेट हेड रहीं निशा नाथ पांडेय और अन्य लोगों ने चैनल प्रबंधन पर डिपॉजिट, मासिक वसूली और रिपोर्टरों से पैसे लेकर नियुक्ति कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अब यह लिखित नियम उन आरोपों को सिर्फ बयान नहीं, बल्कि दस्तावेज़ी आधार देते नजर आ रहे हैं।

मीडिया जगत में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि अगर यह नियम वास्तव में लागू किए गए, तो क्या यह श्रम कानूनों, प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की मर्यादा का खुला उल्लंघन नहीं है? वहीं, यह भी पूछा जा रहा है कि क्या ऐसे चैनलों पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और श्रम विभाग की कोई नजर है या नहीं।

IND 24 प्रकरण एक बार फिर यह बहस छेड़ रहा है कि देश में पत्रकारिता के नाम पर कहीं संगठित उगाही का मॉडल तो नहीं चल रहा।