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UP News: वैश्विक मंच तक पहुंचेगा भारतीय ज्ञान: कानपुर की प्राचीन पांडुलिपियां होंगी डिजिटल

उत्तरप्रदेश
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UP News: Kanpur में भारतीय ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने और उसे वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से ज्ञान भारतम् मिशन को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पहल को Yogi Adityanath सरकार का विशेष समर्थन मिल रहा है।

जिलाधिकारी Jitendra Pratap Singh की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।

मंदिरों और निजी संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण

बैठक में बताया गया कि जिले के विभिन्न मंदिरों, मठों, आश्रमों, संस्कृत पाठशालाओं, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में सदियों पुरानी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। इन पांडुलिपियों में धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, इतिहास और साहित्य से जुड़ा बहुमूल्य ज्ञान मौजूद है।

अब आधुनिक तकनीक की मदद से इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा, ताकि यह ज्ञान आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रह सके।

ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप से होगा सर्वे और जीपीएस आधारित डाटा संग्रह

इस अभियान के तहत Gyan Bharatam App की सहायता से सर्वेक्षण कार्य किया जाएगा। सर्वे टीम पांडुलिपियों की पहचान कर उनका जीपीएस लोकेशन, फोटो, संख्या और वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण ऐप में अपलोड करेगी।

इसके बाद संस्कृति विभाग की विशेषज्ञ टीम इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करेगी, जिससे उनका सुरक्षित और व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा।

शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को मिलेगा वैश्विक स्तर पर अध्ययन का अवसर

जिलाधिकारी ने बताया कि यह पहल केवल धरोहर संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर नई पीढ़ी और वैश्विक शोध समुदाय तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के बाद देश-विदेश के शोधकर्ता, विद्यार्थी और अध्येता इन पांडुलिपियों का आसानी से अध्ययन कर सकेंगे और भारतीय ज्ञान को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी।

पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल संग्रहकर्ताओं के पास ही रहेगा सुरक्षित

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पांडुलिपियों का स्वामित्व उनके मूल संग्रहकर्ताओं के पास ही रहेगा। सरकार और संस्कृति विभाग केवल डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

यह पहल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।