UP News: 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषयक संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देते हुए प्रदेशवासियों से प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया और तस्करों के प्रति सजग रहने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानवता सुरक्षित रह पाएगी। उन्होंने लोगों से जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने और पानी की बर्बादी रोकने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई सार्वजनिक स्थानों पर पानी बहा रहा है या जल संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहा है तो समाज को ऐसे लोगों को रोकना चाहिए।
विश्व पर्यावरण दिवस पर दिलाए पांच संकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए पांच संकल्प दिलाए। इनमें ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाना, लगाए गए पौधों की सुरक्षा करना, जल संरक्षण करना, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करना और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाना शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों को चॉकलेट वितरित की, कपड़े के झोले बांटे और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने बच्चों के साथ सेल्फी भी ली और वृक्ष कलश में जल अर्पित किया।
जलवायु परिवर्तन बन रहा बड़ी चुनौती
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बन चुका है। मौसम चक्र में बदलाव के कारण किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है। कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जैव विविधता का नुकसान और जल संकट मानव जीवन के लिए गंभीर खतरे बनते जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराएं हमेशा प्रकृति के संरक्षण का संदेश देती रही हैं। हमारे धर्मग्रंथों में पशु-पक्षियों, वृक्षों और जल स्रोतों के महत्व को विशेष स्थान दिया गया है।
जल और वन संरक्षण पर दिया जोर
सीएम योगी ने कहा कि “जल है तो कल है और वन है तो जीवन है।” उन्होंने तालाबों, पोखरों, कुओं और बावड़ियों को संरक्षित करने की जरूरत बताई। ग्राम प्रधानों, नगर निकायों और जनप्रतिनिधियों से उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब 13 रामसर साइट्स हैं, जबकि नौ वर्ष पहले केवल एक रामसर साइट थी। गोरखपुर के रामगढ़ताल और चिलुआताल जैसे जल स्रोतों के संरक्षण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से पर्यावरण और स्थानीय जल व्यवस्था दोनों को लाभ मिला है।
जुलाई में लगेगा 35 करोड़ पौधों का महाअभियान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में पौधरोपण के लिए पौधों की संख्या सीमित थी, लेकिन आज सरकारी और निजी नर्सरियों में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जुलाई में एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का विशाल अभियान भी चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। राज्य में बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे का विकास होने के बावजूद वन क्षेत्र बढ़ाने में सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है और सभी को मिलकर प्रकृति की रक्षा के लिए आगे आना होगा।
