मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
SMS Hospital: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर (Trauma Center) में रविवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। न्यूरो आईसीयू वार्ड (Neuro ICU Ward) में लगी भीषण आग (Massive Fire) में 7 मरीजों की मौत हो गई, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। हादसा रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर हुआ, जब आईसीयू के स्टोर रूम से अचानक धुआं उठने लगा। बताया जा रहा है कि वहां मेडिकल पेपर, ब्लड सैंपल ट्यूब और अन्य सामान रखा था। पढ़िए पूरी खबर…

ये भी पढ़ेंः क्या हाथ पर नंबर लिखने से आप अमीर बन सकते हैं?
आपको बता दें कि मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने आग लगने की सूचना 20 मिनट पहले ही दे दी थी, लेकिन प्रशासन ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि आग लगने के दौरान कुछ डॉक्टर मौके से चले गए और मरीजों को बचाने की कोशिश नहीं की गई। इस लापरवाही पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह के सामने लोगों ने जमकर नाराजगी जताई।
मौके पर पहुंचे सीएम भजनलाल शर्मा
घटना की जानकारी मिलते ही सीएम भजनलाल शर्मा (CM Bhajanlal Sharma) देर रात ही अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए और फोन पर लगातार अपडेट लेते रहे। सीएम के साथ चिकित्सा शिक्षा सचिव अंबरीश कुमार, पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ, कलेक्टर जितेंद्र सोनी, और SMS मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी भी मौजूद रहे।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने हाईलेवल जांच कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। वहीं, राज्य मंत्री किरोड़ी लाल मीणा भी मौके पर पहुंचे और मरीजों को सुरक्षित निकालने में मदद की। उन्होंने कहा कि सभी मरीजों को बाहर निकाल लिया गया है और घायलों का इलाज जारी है।

ख़बरीमीडिया के Whatsapp ग्रुप को फौलो करें https://whatsapp.com/channel/0029VaBE9cCLNSa3k4cMfg25
शॉर्ट सर्किट से लगी आग का अनुमान
ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर डॉ. अनुराग धाकड़ के अनुसार, प्राथमिक जांच में हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट प्रतीत होता है। जब आग लगी, उस समय आईसीयू में कुल 11 मरीज भर्ती थे, जबकि पास के वार्ड में 13 मरीज मौजूद थे। आग लगते ही वार्ड में अफरातफरी मच गई और धुआं तेजी से फैल गया।
धुएं से दम घुटने से गई जानें
डॉ. अनुराग धाकड़ ने कहा कि आईसीयू की संरचना पूरी तरह सील्ड होती है और अंदर प्रेशर मेंटेन रहता है। इस कारण धुआं तेजी से अंदर भर गया, जिससे स्टाफ को भीतर रुकना मुश्किल हो गया। पांच मरीजों को स्टाफ ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन छह मरीजों की मौत जहरीली गैस और धुएं के कारण हो गई।
मृतकों की पहचान पिंटू (सीकर), दिलीप (आंधी, जयपुर), श्रीनाथ (भरतपुर), रुकमणि (भरतपुर), कुषमा (भरतपुर), सर्वेश (आगरा, यूपी) और बहादुर (सांगानेर, जयपुर) के रूप में हुई है।

2025 में दूसरी बार लगी आग
यह हादसा इस साल की दूसरी आग की घटना है। जनवरी 2025 में भी एसएमएस अस्पताल के आयुष्मान टावर में वेल्डिंग के दौरान आग लगी थी। लेकिन उस समय कोई हताहत नहीं हुआ था, लेकिन पूरे भवन में धुआं फैल गया था। उस घटना ने भी अस्पताल की फायर सेफ्टी ऑडिट पर सवाल खड़े किए थे।
ये भी पढ़ेंः Darjeeling: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में लैंडस्लाइड, 14 से ज़्यादा लोगों की मौत
सुरक्षा पर सवाल, तत्काल सुधार की जरूरत
SMS हॉस्पिटल में बार-बार आग की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तत्काल फायर ऑडिट, वायरिंग अपग्रेड और स्टाफ ट्रेनिंग की जरूरत है। अगर इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और जानें ले सकती हैं। यह हादसा अस्पताल प्रशासन और सरकार के लिए खतरे की घंटी है।

