Punjab News: पंजाब में हाल ही में लागू किए गए बेअदबी विरोधी कानून को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक बेअदबी के मुद्दे पर राजनीति की, अब जब सख्त कानून लागू हो गया है, तो उनके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं बचे हैं। यह चुप्पी अपने आप में कई राजनीतिक संकेत देती है।
आप सरकार ने कुछ ही दिनों में लागू किया सख्त कानून
बलतेज पन्नू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पंजाब की भगवंत मान सरकार ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई करते हुए एक मजबूत कानून लागू किया है।
उन्होंने बताया कि
- 13 अप्रैल 2026 को बिल पेश किया गया
- 17 अप्रैल 2026 को राज्यपाल ने मंजूरी दी
- 20 अप्रैल 2026 को इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हो गया
उन्होंने कहा कि इतने कम समय में कानून बनाना सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है। यह कदम दिखाता है कि सरकार धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए गंभीर है।
कानून में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
आप नेता ने बताया कि नए कानून में बेअदबी के मामलों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
इस कानून के तहत:
- दोषी को उम्रकैद तक की सजा मिल सकती है
- 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है
उन्होंने कहा कि इस तरह के कड़े प्रावधान अपराधियों में डर पैदा करेंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेंगे।
विपक्षी दलों पर साधा निशाना
बलतेज पन्नू ने अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सरकारों ने वर्षों तक बेअदबी के मुद्दे को केवल राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन कोई ठोस और प्रभावी कानून नहीं बनाया।

उन्होंने कहा कि कई बार बिल लाए गए, लेकिन उन्हें कानून बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए। इससे यह मुद्दा लंबे समय तक अनसुलझा रहा।
पुरानी घटनाओं का किया जिक्र
पन्नू ने 2015, 1986 और 1978 की बेअदबी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय की सरकारें प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रहीं।
उन्होंने कहा कि 2015 की घटनाओं के दौरान कई महीनों तक भड़काऊ पोस्टर लगाए जाते रहे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। इससे लोगों का विश्वास कमजोर हुआ।
एसजीपीसी और अकाली दल की चुप्पी पर सवाल
बलतेज पन्नू ने कहा कि कानून लागू होने के बाद भी शिरोमणि अकाली दल और उसकी लीडरशिप की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
उन्होंने यह भी कहा कि एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी द्वारा बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस न करना भी चिंता का विषय है। यह स्थिति राजनीतिक दबाव और स्पष्टता की कमी को दर्शाती है।
विशेष सत्र में अकाली दल की गैरहाजिरी पर उठे सवाल
आप नेता ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा के विशेष सत्र में अकाली दल का एकमात्र विधायक भी मौजूद नहीं था, जहां यह बिल पास किया गया।
उन्होंने कहा कि इतिहास में यह दर्ज होगा कि धार्मिक मर्यादा की रक्षा के लिए कौन आगे आया और किसने इस महत्वपूर्ण मौके पर गैरहाजिरी चुनी।
कानून बनाने से पहले विशेषज्ञों से ली गई सलाह
बलतेज पन्नू ने बताया कि इस कानून को बनाने से पहले सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों और धार्मिक नेताओं से व्यापक सलाह-मशविरा किया था। उन्होंने कहा कि यह कोई जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए सोच-समझकर कदम उठाया गया है। बेअदबी विरोधी कानून के लागू होने के बाद पंजाब की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
