Private School: प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बाद समोसा क्यों बेचने लगे मास्टरजी, बयाँ किया दर्द

TOP स्टोरी उत्तरप्रदेश खबरी हिंदी
Spread the love

Private School: उत्तर प्रदेश के झांसी से सामने आई एक शिक्षक की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब 27 वर्षों तक निजी स्कूल में पढ़ाने के बाद अब 55 वर्षीय शिक्षक अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए समोसे बेच रहे हैं। उनका कहना है कि निजी स्कूल की नौकरी से मिलने वाली आय से घर का खर्च चलाना संभव नहीं था, इसलिए मजबूरी में उन्होंने यह रास्ता चुना।

27 साल तक पढ़ाया अंग्रेजी, गणित और विज्ञान

झांसी के एरच क्षेत्र के रहने वाले ब्रिजकिशोर चौरसिया ने बताया कि उन्होंने करीब 27 वर्षों तक एक निजी जूनियर हाई स्कूल में अंग्रेजी, गणित और विज्ञान पढ़ाया। शिक्षा के प्रति समर्पण के बावजूद उन्हें पर्याप्त आय नहीं मिल सकी, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया।

सिर्फ 100 रुपये थी फीस, कई बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया

ब्रिजकिशोर चौरसिया के अनुसार, जिस स्कूल में वे पढ़ाते थे वहां छात्रों की मासिक फीस लगभग 100 रुपये थी। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण कई अभिभावक इतनी फीस भी नियमित रूप से नहीं दे पाते थे।

उन्होंने बताया कि कई जरूरतमंद बच्चों को उन्होंने बिना फीस लिए पढ़ाया। इतना ही नहीं, जिन बच्चों के पास कॉपी-किताबें नहीं थीं, उन्हें अपनी ओर से शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई और कई बार भोजन तक कराया।

अब साइकिल पर बेचते हैं समोसे

शिक्षक ने बताया कि परिवार में पत्नी और एक बच्चे की जिम्मेदारी है। घर का खर्च चलाने के लिए अब वे साइकिल पर समोसे बेचते हैं। उनका कहना है कि वे प्रति समोसा पांच रुपये में बेचते हैं और इसी से परिवार का गुजारा कर रहे हैं।

निजी स्कूलों की स्थिति पर उठे सवाल

ब्रिजकिशोर चौरसिया का कहना है कि निजी स्कूलों में शिक्षकों की आर्थिक स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। उनका मानना है कि कम वेतन और सीमित आय के कारण कई शिक्षकों के लिए परिवार का पालन-पोषण करना कठिन हो जाता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

यह कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने शिक्षक के समर्पण और संघर्ष की सराहना की। कई लोगों ने इसे निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल बताया।

कुछ उपयोगकर्ताओं ने कहा कि जो शिक्षक वर्षों तक समाज के भविष्य को संवारते हैं, उन्हें सम्मानजनक आय और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। वहीं कई लोगों ने ब्रिजकिशोर चौरसिया के संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण को प्रेरणादायक बताया।