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Bihar News: बिहार में 7 हजार जीविका दीदियों को मिला डेयरी और पशुपालन का प्रशिक्षण, अब गांवों की महिलाओं को सिखाएंगी गुर

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Bihar News: पटना, 21 जुलाई 2026: बिहार में ग्रामीण महिलाओं को डेयरी और पशुपालन के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने करीब 7 हजार जीविका दीदियों को डेयरी और पशुपालन का विशेष प्रशिक्षण दिया है।

प्रशिक्षण हासिल करने वाली ये पशु सखियां अब अपने-अपने गांवों में डेयरी और पशुपालन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्यों को प्रशिक्षण देंगी।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिला प्रशिक्षण

यह विशेष प्रशिक्षण मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दिया गया है। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग के अधीन बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति यानी जीविका और डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की संस्था कॉम्फेड मिलकर काम कर रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य पशुपालन और दूसरे रोजगार से जुड़ी महिलाओं को जरूरी कौशल देकर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है।

1.5 करोड़ से अधिक जीविका दीदियों को मिली पहली किस्त

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत राज्य की 1.5 करोड़ से अधिक महिला सदस्यों को निर्धारित राशि की पहली किस्त दी जा चुकी है।

अब कृषि, पशुपालन और अलग-अलग उद्यमों से जुड़ी इन महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत पहले से चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अलग और अतिरिक्त है।

पहले चरण में पशु सखियों को किया गया प्रशिक्षित

जीविका के मुताबिक, पशुपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में पशु सखियों, आजीविका विशेषज्ञों और प्रत्येक प्रखंड के सीएलएफ नोडल कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

कॉम्फेड के माध्यम से प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके लिए कॉम्फेड और जीविका की ओर से जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई थी।

अब गांव-गांव जाकर महिलाओं को देंगी ट्रेनिंग

प्रखंड परियोजना प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली पशु सखियां अपने गांवों में डेयरी गतिविधियों से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जल्द प्रशिक्षण देना शुरू करें।

ग्राम संगठन के सामुदायिक प्रेरक और संबंधित परियोजना कर्मियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम की कार्यवाही को ग्राम संगठन स्तर पर दर्ज भी किया जाएगा।

बकरी, भेड़ और सूअर पालन की भी मिलेगी जानकारी

पशु सखियों का प्रशिक्षण केवल डेयरी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। वे भेड़, बकरी और सूअर समेत अन्य छोटे पशुओं का पालन करने वाली महिलाओं को भी प्रशिक्षण देंगी।

इसके लिए डेयरी प्रशिक्षण से अलग विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों की जानकारी और कार्यवाही भी ग्राम संगठन स्तर पर दर्ज की जाएगी।

गांवों में तैयार होगा प्रशिक्षित महिलाओं का नेटवर्क

इस पहल के जरिए बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित पशु सखियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही है। ये महिलाएं गांव स्तर पर दूसरी महिलाओं तक पशुपालन और डेयरी से जुड़ी जरूरी जानकारी पहुंचाएंगी।

सरकार को उम्मीद है कि प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं को पशुपालन को बेहतर तरीके से रोजगार के साधन के रूप में अपनाने में मदद मिलेगी। इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायता मिल सकती है।