नोएडा के जेवर एयरपोर्ट पर ‘ग्रहण’!

दिल्ली NCR

नोएडा के जेवर एयरपोर्ट से जो ख़बर आ रही है वो अच्छी नहीं कही जा सकती। फिलहाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में बाधा उत्पन्न होती दिख रही है। एयरपोर्ट की बाउंड्रीवॉल के निर्माण के क्रम में किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है। 13.45 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा नहीं दे रहे हैं। उनका दावा है यह जमीन सोर है। इस बंजर जमीन में रेहू होता है। इसके मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया है।

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किसानों के विरोध और जमीन पर कब्जा नहीं दिए जाने के का कारण काम अटक गया है। दरअसल, जेवर में नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट का निर्माण इन दिनों तेजी से हो रहा है। जनवरी 2024 से इसका ट्रायल शुरू करने और अक्टूबर से कमर्शल उड़ान भरे जाने की तैयारी है। यहां सारे काम तो तेजी से चल रहे हैं लेकिन इसकी बाउंड्री वॉल पूरी कराने का काम बीच में अटक गया है।

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जमीन के अधिग्रहण में मुआवजे का पेच फंसा होने के चलते किसानों के साथ विवाद चल रहा है। इसके चलते किसान इस जमीन का कब्जा नहीं दे रहे हैं। अब सवाल यही है कि एयरपोर्ट शुरू कराने की कवायद तो काफी तेज है, लेकिन इसकी बाउंड्री पूरी किए बिना इसे कैसे चालू किया जाएगा। बाउंड्री अधूरी होने की वजह से एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा रहेगा। दरअसल, जेवर में निर्माणाधीन एयरपोर्ट की 17 किमी लंबी बाउंड्री वॉल होनी है। सबसे पहले इसके काम को ही शुरू किया गया था लेकिन यह अभी पूरा नहीं हो पाया है। इसके पूरा न होने से एयरपोर्ट के निर्माणाधीन कार्य के दौरान आए दिन वन्य जीव भी आते रहते हैं। ये साइटों पर निर्माण कार्य में बाधा डाल रहे हैं। इन वन्य जीवों के लिए रिहैब सेंटर बनाने के लिए अलग कवायद चल रही है।

तीनों चरण में आ रही हैं सोर की जमीन

एयरपोर्ट के तीन चरण में अधिग्रहित होने वाली जमीन में सोर की जमीन आ रही है। फिलहाल पहले चरण में 1334 हेक्टेयर जमीन में से 13.45 हेक्टेयर जमीन सोर की है। जिसकी वजह से इसकी चारदीवारी पूरी होने का पेच फंसा हुआ है। दूसरे चरण में 1365 हेक्टेयर जमीन पर एयरपोर्ट का निर्माण होना है। इसमें 52 हेक्टेयर जमीन सोर की आ रही है। इसकी तरह तीसरे चरण में 1310 हेक्टेयर जमीन पर निर्माण होना है जिसमें 90 हेक्टेयर जमीन सोर की है।

क्या है सोर की जमीन

जिस जमीन पर रेहु होता है वह बंजर जमीन होती हैं। यानी कि उसकी मिट्टी उपजाऊ नहीं होती और उसपर फसलों की पैदावार नहीं होती है। इस रेहु का इस्तेमाल पुराने जमाने में लोग कपड़े धोने में भी किया करते थे। इस जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए इसकी मिट्टी कई तरह की चीजें मिलाकर उपजाऊ बनाई जा सकती थी। 1920 के बाद इस जमीन को लेकर प्रावधान बनाया गया। पहले यह जमीन ऐसे ही पड़ी रहती थी, लेकिन प्रावधान बनने के बाद इस जमीन का किसानों को पट्टा दिया गया और फिर मालिकाना हक मिल गया। किसी जमीन का मालिकाना हक मिलने के बाद किसान उस जमीन के मुआवजे के हकदार भी हो जाते हैं।

इस तरह फंस गया है पेच

एयरपोर्ट के प्रथम चरण की जमीन अधिग्रहित करने के दौरान जिला प्रशासन ने इस मामले में शासन से पत्राचार भी किया था कि तालाब, पोखर और सोर की जमीन का मुआवजा कैसे दिया जाएगा। कुछ दिन तक पत्राचार होने के बाद मामला ठंडा हो गया। जब इस पर कुछ स्पष्ट जवाब शासन से नहीं मिला तो 1334 हेक्टेयर में से सोर की जमीन के अलावा बाकी का अधिग्रहण हो गया। इस बारे में शासन से स्पष्ट निर्देश न होने के कारण उस समय इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब एयरपोर्ट का ट्रायल शुरू होने में 7 महीने बचे हैं। अभी इस जमीन का कब्जा किसानों के ही पास है। अब बाउंड्री वॉल का मसला फंसने के चलते एक बार फिर इसे लेकर शासन के साथ पत्राचार शुरू हुआ है। (सौ. एनबीटी)

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