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Jharkhand में गिद्धों की संख्या बढ़ाने की पहल, जानिए कैसे इन पक्षियों को मिलेगा नया जीवन?

झारखंड राजनीति
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Jharkhand के सीएम हेमंत सोरेन के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य में गिद्ध संरक्षण को नई ऊंचाई मिलने जा रही है।

Jharkhand News: झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य में गिद्ध संरक्षण को नई ऊंचाई मिलने जा रही है। लंबे इंतजार के बाद राज्य का पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र (Vulture Conservation and Breeding Centre) अब हकीकत का रूप लेने वाला है। सोरेन सरकार की कैबिनेट ने बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के साथ तकनीकी सहयोग के लिए MoU को मंजूरी दे दी है, जिससे यह केंद्र जल्द ही पूरी तरह चालू हो सकेगा। पढ़िए पूरी खबर…

Pic Social Media

रांची से महज 36 किमी दूर तैयार हुआ अत्याधुनिक केंद्र

सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) की संवेदनशील सोच का नतीजा है कि रांची से करीब 36 किलोमीटर दूर मूटा में बना यह केंद्र अब फिर से सक्रिय होने जा रहा है। साल 2009 में केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी दी थी और 2013 में 41 लाख रुपये खर्च कर मुख्य पिंजरा, छोटा अस्पताल और केयर यूनिट तैयार हो चुके थे, लेकिन नौकरशाही अड़चनों के कारण यह बंद पड़ा था। अब हेमंत सरकार ने सभी बाधाओं को दूर कर इसे चालू करने का ठोस फैसला लिया है।

अन्य राज्यों से आएंगे गिद्ध, प्रजनन की बनेगी मजबूत व्यवस्था

वन विभाग के मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एसआर नटेश ने कहा कि देश के अन्य गिद्ध केंद्रों से जल्द ही कुछ गिद्धों को प्रजनन के लिए झारखंड लाया जाएगा। केंद्र में बची हुई मरम्मत का काम भी शीघ्र शुरू होगा और इसके लिए अतिरिक्त फंड की मांग सरकार से की जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर यह सारा काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।

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कोडरमा में पहले से चल रहा ‘गिद्ध रेस्तरां’

हेमंत सरकार की सक्रियता का एक और उदाहरण कोडरमा जिले में चल रहा अनोखा ‘गिद्ध रेस्तरां’ है। तिलैया नगर परिषद के गुमो में एक हेक्टेयर जमीन पर बने इस केंद्र में गिद्धों को डाइक्लोफिनेक-मुक्त मरे पशुओं का मांस परोसा जाता है। यह प्रयोग इतना सफल रहा कि राज्य में गिद्धों की संख्या बढ़ने लगी है। ताजा सर्वे के अनुसार झारखंड में अब 400 से 450 गिद्ध बचे हैं, जो पहले के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति है।

डाइक्लोफिनेक की मार से उबर रही गिद्ध प्रजातियां

एक समय था जब डाइक्लोफिनेक दवा की वजह से देशभर में गिद्ध लगभग खत्म हो गए थे। अब सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में संरक्षण के ठोस कदमों से झारखंड में सफेद पीठ वाला गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध, हिमालयी गिद्ध, मिस्री गिद्ध, लाल सिर वाला गिद्ध और सिनेरियस गिद्ध जैसी प्रजातियाँ फिर से सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

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सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता से जल्द ही झारखंड का आसमान फिर से गिद्धों की उड़ान से गुलजार होने वाला है। नया प्रजनन केंद्र और गिद्ध रेस्तरां जैसे नवाचारी कदम राज्य को देश में गिद्ध संरक्षण का मॉडल बनाने जा रहे हैं।