Haryana News: 3 जून 2026, हरियाणा सरकार ने राज्य की सहकारी चीनी मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें घाटे से बाहर निकालने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य की सभी सहकारी चीनी मिलों को अगले एक वर्ष के भीतर मुनाफे में लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को मिलों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा करने और उनकी कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार लाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह निर्देश हरियाणा विजन-2047 के तहत सहकारिता विभाग की पांच वर्षीय कार्ययोजना और रोडमैप की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सहकारी चीनी मिलों का बेहतर प्रदर्शन किसानों के हितों से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए इन संस्थानों का आर्थिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह स्वयं तीन महीने बाद विभाग की कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
घाटे की वजह तलाशने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब राज्य की निजी चीनी मिलें लाभ में चल रही हैं तो सहकारी चीनी मिलें लगातार घाटे में क्यों हैं। उन्होंने सभी मिलों की स्थिति का अलग-अलग अध्ययन करने और घाटे के वास्तविक कारणों की पहचान करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने चालू वर्ष में सहकारी चीनी मिलों को 632 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके बावजूद यदि मिलें अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मिलों के प्रदर्शन में बाधा बनने वाली सभी कमियों को जल्द से जल्द दूर किया जाए।
लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव को विभाग के कामकाज और मानव संसाधन व्यवस्था का गहन विश्लेषण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग में पूर्ण बदलाव लाने की आवश्यकता है ताकि कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके।
साथ ही मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जो अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनका मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना किसी भी संस्था में सुधार संभव नहीं है।
सीबीजी प्लांट और आधुनिकीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सहकारी चीनी मिलों के आधुनिकीकरण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि अगले वित्तीय वर्ष तक राज्य की सभी सहकारी चीनी मिलों में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य पूरा किया जाए।
सरकार का मानना है कि इन प्लांटों से अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित होंगे और मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इसके अलावा एथेनॉल और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे चीनी उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
कुशल मानव संसाधन तैयार करने की योजना
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि चीनी मिलों में कुशल तकनीकी कर्मचारियों की कमी है। कई विशेष तकनीकी पाठ्यक्रम केवल पुणे और कानपुर जैसे शहरों में उपलब्ध हैं, जिससे प्रशिक्षित मानव संसाधन जुटाने में कठिनाई होती है।
इस पर मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में चीनी उद्योग से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उद्योग को प्रशिक्षित कार्यबल भी उपलब्ध होगा।
सहकारी क्षेत्र को तकनीक से जोड़ने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के शत-प्रतिशत कंप्यूटरीकरण के भी निर्देश दिए। उनका मानना है कि डिजिटल तकनीक अपनाने से पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यप्रणाली तेज होगी और किसानों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य केवल सहकारी चीनी मिलों को घाटे से बाहर निकालना नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक, आत्मनिर्भर और किसानों के लिए अधिक उपयोगी संस्थान बनाना भी है। सरकार की यह पहल राज्य के चीनी उद्योग, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
