Govardhan Puja: गोवर्धन पूजा दिवाली के बाद मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है।
Govardhan Puja: गोवर्धन पूजा दिवाली (Diwali) के बाद मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पूजा प्रकृति के प्रति सम्मान दर्शाती है और इसका आरंभ भगवान कृष्ण (Lord Krishna) ने किया था। इस दिन विशेष रूप से गाय की पूजा की जाती है, जो समाज की आधारशिला मानी जाती है। गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) की शुरुआत ब्रज क्षेत्र से हुई थी, जो अब पूरे भारत में धूमधाम से मनाई जाती है। यह त्योहार ब्रज (मथुरा, वृंदावन), गुजरात और राजस्थान में विशेष रूप से लोकप्रिय है। पढ़िए पूरी डिटेल्स…

ये भी पढ़ेंः Vastu Dosh: क्या आप भी दरवाज़े के पीछे कपड़े टांगते हैं, खबर पढ़ लीजिए
गोवर्धन पर्वत की पूजा का धार्मिक महत्व
गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) के दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपने छोटे से अंगूठे पर यह पर्वत उठाकर इंद्रदेव के अहंकार को परास्त किया था। इस पर्व पर छप्पन भोग यानी 56 प्रकार के व्यंजन भगवान को अर्पित किए जाते हैं, जिनमें दाल, चावल, मिठाई, फल और सब्जियां शामिल होती हैं। यह भोग भगवान के प्रति कृतज्ञता और प्रेम का प्रतीक होता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।
गोवर्धन पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा की प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर की शाम 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 22 अक्टूबर की रात 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगी।
द्रिक पंचांग के मुताबिक, पूजा का पहला शुभ मुहूर्त 22 अक्टूबर को सुबह 6:26 से लेकर 8:42 बजे तक है। दूसरा मुहूर्त दोपहर 3:29 से शाम 5:44 बजे तक रहेगा।
कैसे करें गोवर्धन पूजा?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर और आंगन की सफाई करें। इसके बाद गाय के गोबर से या अनाज से गोवर्धन पर्वत जैसा छोटा सा मॉडल बनाएं। इसके आस-पास बछड़े और ग्वालिन की मूर्तियां रखें, फिर दीपक, फूल, जल और अन्न अर्पित करें। पूजा के बाद गोवर्धन की परिक्रमा करें।
गाय और बछड़ों की भी पूजा की जाती है, उन्हें गुड़ खिलाएं और चारा दें। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और बच्चों का व्यवहार भी सुधरता है। यह पूजा मानसिक शांति और चिंता कम करने में भी लाभकारी मानी जाती है। पूजा के बाद भगवान को छप्पन भोग लगाएं और इसे ब्राह्मण, गरीबों या परिवार में बांटें। साथ ही शाम को दीपदान जरूर करें जिससे अंधकार दूर होता है और जीवन में खुशहाली आती है।
गोवर्धन पूजा के मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करें।
- ॐ अन्नपूर्णायै नमः
- ॐ गोवर्धनाय नमः
- ॐ गोकुलेश्वराय नमः
- ॐ धनधान्यवृद्धये नमः
- ॐ नमो गोवर्धनाय
- ॐ नमो गोवर्धनाय नमः
- ॐ गोवर्धनाय वंदे जगत्प्रभवे
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
विष्णु पुराण में गोवर्धन पूजा का महत्व बताया गया है। कथा के अनुसार, देवराज इंद्र अपने अहंकार के कारण गोकुलवासियों की पूजा की मांग करते थे। भगवान कृष्ण ने इस अहंकार को दूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत की पूजा का आदेश दिया क्योंकि वहीं उनकी गायें चरती थीं और पेड़-पौधे वहां बारिश का कारण थे।
ये भी पढ़ेंः Vastu Tips: घर की इस दिशा में लक्ष्मी-कुबेर की लगाएं तस्वीर, धन की कमी नहीं होगी!
इंद्र के क्रोध से मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे गोकुलवासियों को भारी संकट का सामना करना पड़ा। तब भगवान कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी को उसकी छत्रछाया में रखा। सात दिन तक चली बारिश के बावजूद कोई नुकसान नहीं हुआ। अंततः इंद्र ने भगवान कृष्ण से क्षमा मांगी और उनकी पूजा की। इसी घटना के बाद से गोवर्धन पूजा का पर्व मनाना शुरू हुआ।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। ख़बरी मीडिया किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
