Dr Rajendra Prasad: आज देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का निधन 28 फरवरी 1963 को पटना के सदाकत आश्रम में हुआ था। उनके योगदान को याद करते हुए, सीएम नीतीश कुमार ने उनके देश के निर्माण में अहम योगदान की सराहना की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान नेता थे, जिन्होंने नव स्वतंत्र भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। देश की आज़ादी के संघर्ष के बाद जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने देश की कमान संभाली, तो दूसरी कमान डॉ. राजेंद्र प्रसाद के हाथों में थी। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण तक अपनी समर्पित सेवा दी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन और योगदान
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के ज़िरादेई गांव में एक चित्रगुप्तवंशी कायस्थ परिवार में हुआ था। बचपन में ही अपनी मां का साया सिर से उठ जाने के बाद उन्होंने कठिनाईयों का सामना किया, लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी लगन ने उन्हें सफलता दिलाई। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और वहां से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की।

पारिवारिक जिम्मेदारियां और शिक्षा
राजेंद्र प्रसाद ने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी, और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। 1906 में उन्होंने पटना कॉलेज के हॉल में बिहारी स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस की स्थापना की, जो बिहार के भविष्य के नेताओं को प्रेरित करने वाला एक मंच बना।
स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रपति का पद
1917 में गांधी जी के साथ चंपारण आंदोलन और असहयोग आंदोलन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के बाद, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। 26 जनवरी 1950 को जब भारत गणराज्य बना, तो डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। उन्होंने 12 वर्षों तक इस पद पर कार्य किया और भारत के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1962 में राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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निधन
28 फरवरी 1963 को पटना के सदाकत आश्रम में उनका निधन हुआ। आज उनके योगदान को याद करते हुए पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का योगदान भारतीय राजनीति और स्वतंत्रता संग्राम में सदैव याद रखा जाएगा।
