Delhi News: सीएम रेखा गुप्ता ने दिल्ली की हर जमीन को मिलेगा ‘भू-आधार कार्ड’ योजना शुरू की

दिल्ली
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Delhi News: दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत राजधानी दिल्ली में हर जमीन या भूखंड को एक 14-अंकों वाला यूनिक पहचान नंबर (ULPIN) दिया जाएगा। इस पहल को ‘भू-आधार’ यानी भूमि-आधार कहा गया है। इसका उद्देश्य भूमि संबंधी विवादों को कम करना और जमीन आराम से पहचानने तथा रिकॉर्ड करने में मदद करना है। यह योजना प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के अंतर्गत भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा है कि यह नंबर केवल एक पहचान संख्या नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली डिजिटल साधन होगा जिससे भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। इससे जमीन के मालिकाना हक और सीमाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों को कम करने में सहायता मिलेगी।

14-अंकों वाला यूनिक कोड से क्या होगा लाभ

प्रत्येक भूभाग को मिलने वाला यह 14-अंकों वाला कोड यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) कहलाता है। इसे ‘आधार-कार्ड’ की तरह भूमि के लिए लागू किया जा रहा है। इससे जमीन की पूरी जानकारी एक ही नंबर में दर्ज रहेगी। जब तक जमीन का एक ही नंबर रहेगा, तब तक अलग-अलग दस्तावेजों में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे भूमि से जुड़े धोखाधड़ी, दस्तावेज़ी विवाद और दोहराए हुए पंजीकरण जैसी समस्याओं पर रोक लग सकेगी।

यह नंबर जियो-रेफरेंस्ड होगा यानी भूखंड की सटीक सीमाओं और कोओर्डिनेट्स के आधार पर भूमि का पूरा विवरण मिलेगा। इससे जिला, नगर और अन्य विभागों के बीच भूमि डेटा साझा करना आसान होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।

डिजिटल भूमि मानचित्र के लिए तकनीक का उपयोग

इस योजना को लागू करने के लिए ड्रोन सर्वे और हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग जैसे अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे दिल्ली का नया डिजिटल भूमि मानचित्र तैयार किया जाएगा। अभी तक पश्चिमी दिल्ली के तिलंगपुर कोटला गाँव में परीक्षण सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जहां 274 रिकॉर्ड पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर में लागू करेगी।

एहतियाती रूप से इस परियोजना के लिए लगभग ₹1.32 करोड़ रुपये पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं, और राजस्व विभाग की आईटी शाखा तथा भारतीय सर्वेक्षण विभाग इसके तकनीकी और डेटा-समर्थन कार्य कर रहे हैं।

आम जनता के लिए सरल और सहूलियतभरा

भू-आधार प्रणाली से आम नागरिकों को भूमि से जुड़ी जानकारी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। एक ही यूनिक कोड से भूमि का मालिकाना हक, सीमा विवरण और रिकॉर्ड तक आसानी से पहुंच संभव होगा। इससे लोगों को दस्तावेज़ों के बोझ से छुटकारा मिलेगा और भूमि विवादों में राहत मिलेगी।

सरकार का कहना है कि इस पहल से भूमि से जुड़े भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और रिकॉर्ड में पारदर्शिता आएगी। इस “भू-आधार” को प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत मिशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा है।

निष्कर्ष

दिल्ली सरकार की यह पहल राजधानी की भूमि रिकॉर्ड प्रणाली को सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाएगी। 14-अंकों वाला यूनिक पहचान नंबर से भूमि विवादों को हल करना, डेटा साझा करना और मालिकाना हक को स्पष्ट रखना आसान होगा। सरकार का लक्ष्य है कि यह सिस्टम जल्द ही पूरे दिल्ली में लागू हो और इससे जनता को भूमि से जुड़ी परेशानियों से निजात मिले।

अगर आप चाहें तो मैं इस योजना का फायदे-नुकसान और अन्य राज्यों में इसी तरह के मॉडल का भी विश्लेषण कर सकता हूँ।