Delhi News: सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को पद की शपथ दिलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, जे.पी. नड्डा, नितिन गडकरी और अन्य गणमान्य व्यक्ति समारोह में उपस्थित रहे। एनडीए के एक वरिष्ठ सूत्र के अनुसार, समारोह के लिए 12 सितंबर की सुबह का समय इसलिए चुना गया क्योंकि पंडित जी ने इसे “शुभ मुहूर्त” बताया था।
ये भी पढ़ें: Lok Adalat: नोएडा-दिल्ली में लगने वाली है लोक अदालत, तारीख़ और जगह नोट कर लें
समारोह से पहले कई राजनीतिक नेता इसमें शामिल होने के लिए दिल्ली पहुँचे। राजधानी में उपस्थित नेताओं में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शामिल थे।
एनडीए के उम्मीदवार चंद्रपुरम पोनुसामी राधाकृष्णन को मंगलवार को भारत का 15वाँ उपराष्ट्रपति चुना गया। उन्हें 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुधर्शन रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। इससे पहले वे महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके हैं। फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक वे झारखंड के राज्यपाल भी रहे। इसके अलावा, मार्च से जुलाई 2024 के बीच उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। भाजपा के वरिष्ठ नेता राधाकृष्णन दो बार कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए और तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
ये भी पढ़ें: Metro: गुड न्यूज़, इस एप से दिल्ली-नोएडा के टिकट एक साथ बुक
राज्यसभा महासचिव एवं चुनाव अधिकारी पी.सी. मोदी ने बताया था कि 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, जो 98.2 प्रतिशत मतदान रहा। इनमें से 752 वोट मान्य पाए गए और 15 अमान्य, जिससे आवश्यक बहुमत 377 रह गया। कागज़ों पर एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन वाईएसआरसीपी के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन को समर्थन दिया। दिलचस्प बात यह रही कि एनडीए उम्मीदवार को अपेक्षा से 14 वोट अधिक मिले, जिससे विपक्षी खेमे से क्रॉस वोटिंग की अटकलें तेज हो गईं। इसके अलावा, 13 सांसदों ने मतदान से परहेज़ किया। इनमें सात सांसद बीजू जनता दल (बीजद) से, चार सांसद भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) से, एक सांसद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से और एक निर्दलीय सांसद शामिल थे।
