Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य में बैंकिंग सेवाओं और ऋण वितरण की स्थिति में सुधार लाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जो बैंक अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं करेंगे, उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगाई जा सकती है। इस संबंध में उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री विजयेंद्र प्रसाद यादव ने बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है।
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पांच महत्वपूर्ण अनुशंसाएं तैयार की गई हैं। सरकार का मानना है कि राज्य में ऋण वितरण और साख जमा अनुपात (सीडी रेशियो) को बेहतर बनाना विकास के लिए जरूरी है।
वार्षिक साख योजना का लक्ष्य बढ़ाने की तैयारी
समिति ने सुझाव दिया है कि यदि बिहार का सीडी रेशियो बढ़ाना है तो संभावित जमा राशि के कम से कम 80 प्रतिशत के बराबर ऋण वितरण का लक्ष्य तय किया जाना चाहिए। इसी दिशा में नाबार्ड ने 3.55 लाख करोड़ रुपये का संभावित ऋण योजना (पीएलपी) तैयार किया है। इसके आधार पर नई वार्षिक साख योजना (एसीपी) तय करने के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) से अनुरोध किया जाएगा।
बड़े बैंकों के प्रदर्शन पर उठे सवाल
समिति की समीक्षा में पाया गया कि यदि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को अलग कर दिया जाए तो बिहार का सीडी रेशियो 68.16 प्रतिशत हो जाता है। वहीं एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक दोनों को अलग करने पर यह आंकड़ा 72.75 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इससे स्पष्ट हुआ कि कई छोटे बैंक बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कुछ बड़े बैंक अपेक्षित स्तर तक ऋण वितरण नहीं कर पा रहे हैं।
इसी कारण समिति ने सिफारिश की है कि बड़े बैंकों को एसीपी के तहत अधिक लक्ष्य दिए जाएं ताकि राज्य का सीडी रेशियो बढ़ सके।
जनसमर्थ पोर्टल से जुड़ेंगी सरकारी योजनाएं
समिति ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और अन्य ऋण आधारित सरकारी योजनाओं को भारत सरकार के जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ने की सिफारिश की है। इससे सभी बैंकों को सीधे आवेदन प्राप्त होंगे और योजनाओं की निगरानी तथा ऋण वितरण प्रक्रिया आसान हो जाएगी। पंचायत स्तर पर आयोजित सहयोग शिविरों में भी जनसमर्थ पोर्टल के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जाएगा।
जीविका दीदियों, स्वयं सहायता समूहों और 50 लाख से अधिक किसानों को इस पोर्टल के माध्यम से जोड़ने की योजना बनाई गई है ताकि अधिक लोगों तक ऋण सुविधाएं पहुंच सकें।
15 बैंकों पर रहेगी विशेष निगरानी
समिति ने उन बैंकों की पहचान की है जिनका सीडी रेशियो और एसीपी प्रदर्शन कमजोर है। यूको बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, एसबीआई, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कर्नाटक बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंडसइंड बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक और करूर वैश्य बैंक सहित 15 बैंकों को निगरानी सूची में रखा गया है।
सरकार ने साफ किया है कि अगले छह महीनों में यदि इन बैंकों के प्रदर्शन में सुधार नहीं दिखा तो उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगाने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बिहार सरकार का यह कदम राज्य में बैंकिंग सेवाओं को अधिक जवाबदेह, प्रभावी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
