Chhattisgarh News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल “परीक्षा पे चर्चा 2026” में छत्तीसगढ़ ने बड़ी सफलता हासिल की है। पालकों (अभिभावकों) की भागीदारी के मामले में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि राज्य की शिक्षा व्यवस्था और समाज की सकारात्मक सोच को दर्शाती है।
25.16 लाख से अधिक पंजीयन, पालकों की भागीदारी सबसे अधिक
अब तक छत्तीसगढ़ से कुल 25.16 लाख लोगों ने पंजीयन कराया है। इनमें 22.75 लाख विद्यार्थी, 1.55 लाख शिक्षक और 81,533 पालक शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि परीक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है और लोग बच्चों को तनावमुक्त रखने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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कुल पंजीयन में देश में चौथा स्थान
पालक सहभागिता में पहला स्थान हासिल करने के साथ-साथ, कुल पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ देश में चौथे स्थान पर है। बलोदाबाजार जिले से 14,658 और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से 9,952 पालकों का पंजीयन इस अभियान के प्रति बढ़ते विश्वास को दिखाता है।
योजनाबद्ध प्रयासों से मिली बड़ी सफलता
इस सफलता के पीछे राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की योजनाबद्ध रणनीति रही है। जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें की गईं, शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर ऑन-स्पॉट पंजीयन की सुविधा दी गई और युवा क्लब व “अंगना म शिक्षा कार्यक्रम” के जरिए समुदाय को जोड़ा गया।
Chhattisgarh News : परीक्षा पे चर्चा मेला बना गेम-चेंजर
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” ने बड़ी भूमिका निभाई। एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन हुए, जबकि पहले रोजाना औसतन 1500 पंजीयन हो रहे थे। इससे लोगों का उत्साह और सहभागिता साफ दिखाई दी।
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छात्रों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी
पिछले वर्ष शामिल रहीं छात्रा युक्तामुखी के प्रेरक अनुभवों ने इस बार ज्यादा विद्यार्थियों को जुड़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं, शिक्षक प्रशिक्षण स्थलों पर ही पंजीयन की व्यवस्था से बड़ी संख्या में शिक्षक भी इस अभियान का हिस्सा बने।
11 जनवरी तक खुला है पंजीयन, 30 लाख का लक्ष्य
परीक्षा पे चर्चा 2026 के लिए पंजीयन 11 जनवरी 2026 तक खुले हैं। राज्य को उम्मीद है कि वह 30 लाख से अधिक पंजीयन का लक्ष्य जल्द पूरा कर लेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने परीक्षा को तनाव नहीं, बल्कि उत्सव के रूप में देखने की प्रधानमंत्री की सोच को पूरी तरह अपनाया है।
