Chhattisgarh News: रायपुर, 20 जुलाई। छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि धमतरी जिले में औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की खेती का मॉडल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और अनुपयोगी भूमि के उपयोग का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। सरकार के अनुसार, इस पहल से महिला स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ी है और अब इस मॉडल का विस्तार 500 एकड़ तक करने की तैयारी की जा रही है।
अनुपयोगी भूमि पर शुरू हुई औषधीय खेती
सरकार के अनुसार, धमतरी जिले में महानदी किनारे की रेतीली और कम उपयोग वाली भूमि पर खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसी औषधीय एवं सुगंधीय फसलों की खेती शुरू की गई। इस अभियान को जिला प्रशासन, राज्य औषधीय पादप बोर्ड और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के सहयोग से वर्ष 2025 में शुरू किया गया।
200 महिलाओं ने 150 एकड़ में शुरू की खेती
सरकारी जानकारी के मुताबिक, पहले चरण में 150 एकड़ क्षेत्र में 200 महिला स्व-सहायता समूहों को इस योजना से जोड़ा गया। इसमें लगभग 80 एकड़ में खस, 20 एकड़ में ब्राह्मी, 10 एकड़ में बच तथा शेष क्षेत्र में लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली का रोपण किया गया।
सरकार का दावा है कि कई स्थानों पर इन फसलों से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।
प्रशिक्षण और बाय-बैक व्यवस्था से बढ़ा भरोसा
योजना के तहत महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, तकनीकी प्रशिक्षण और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। सरकार के अनुसार, उत्पादों की 100 प्रतिशत बाय-बैक व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई, जिससे किसानों और महिला समूहों को विपणन की चिंता नहीं करनी पड़ी।
लाभार्थियों ने साझा किए अनुभव
योजना से जुड़ी महिला किसानों ने बताया कि औषधीय खेती अपनाने के बाद उनकी आय में वृद्धि हुई है और वे अब परिवार की आर्थिक जरूरतों में अधिक योगदान दे पा रही हैं। कई महिलाओं ने कहा कि इससे उन्हें बैंकिंग, समूह प्रबंधन और छोटे उद्यम चलाने का आत्मविश्वास भी मिला है।
कुछ किसानों ने यह भी बताया कि कम पानी वाली भूमि में लेमनग्रास और खस जैसी फसलें अपेक्षा से बेहतर परिणाम दे रही हैं।
‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगी गति
सरकार ने कहा कि यह पहल राज्य के ‘लखपति दीदी’ अभियान को भी मजबूती दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि औषधीय खेती महिलाओं को खेती से आगे बढ़कर उद्यमिता की ओर ले जा रही है।
वैल्यू चेन विकसित करने की तैयारी
सरकार के अनुसार, कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है। भविष्य में स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग, आवश्यक तेल निष्कर्षण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
सरकार के मुताबिक, धमतरी के इस मॉडल को दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इसके बाद विभिन्न राज्यों के किसान और अधिकारी इस मॉडल का अध्ययन करने धमतरी पहुंच रहे हैं।
500 एकड़ तक विस्तार का लक्ष्य
सरकार ने बताया कि पहले चरण की सफलता के बाद अब इस पहल का विस्तार 500 एकड़ तक करने और 500 से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि, उद्यानिकी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड और बिहान मिशन के सहयोग से प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
