Chhattisgarh News: रायपुर, 20 जुलाई। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म का पुरस्कार मिलने पर छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला है।
सरकार ने इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया
संस्कृति मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की उपलब्धि नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी है। उनके अनुसार, इस उपलब्धि से राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता को नई प्रतिष्ठा मिलेगी।
रामनामी परंपरा को संवेदनशील ढंग से किया गया प्रस्तुत
सरकार के अनुसार, रामनामी समाज अपनी विशिष्ट परंपराओं, भगवान श्रीराम के प्रति आस्था और सादगीपूर्ण जीवन शैली के लिए जाना जाता है। शरीर पर ‘श्रीराम’ नाम अंकित कराने की परंपरा इस समाज की विशेष पहचान है। सरकार का कहना है कि डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ ने इन परंपराओं और जीवन मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है, जिससे देश और दुनिया का ध्यान इस सांस्कृतिक विरासत की ओर आकर्षित हुआ है।
लोक संस्कृति और सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस सम्मान से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, जनजातीय एवं पारंपरिक विरासत, लोककलाओं और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति देश-विदेश में लोगों की रुचि बढ़ेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे राज्य के सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
निर्देशक और टीम को दी शुभकामनाएं
संस्कृति मंत्री ने निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे रचनात्मक प्रयास भविष्य में भी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
