Cash on Delivery: भारत में ऑनलाइन खरीदारी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में बिलिंग को लेकर बड़ी चिंता बन गई है।
Cash on Delivery: कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) के नाम पर ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों (E-Commerce Platforms) पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी (Minister Prahlad Joshi) ने इस प्रथा को उपभोक्ताओं का शोषण बताते हुए जांच का आदेश दिया है। मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई एक सोशल मीडिया पोस्ट के वायरल होने के बाद शुरू की गई है, जिसमें ‘डार्क पैटर्न’ (Dark Pattern) के ज़रिए ग्राहकों को गुमराह कर अनुचित चार्ज वसूलने का खुलासा हुआ था। पढ़िए पूरा मामला…

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कैश ऑन डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज का विवाद
कई ई-कॉमर्स कंपनियां कैश-ऑन-डिलीवरी (Cash-on-Delivery) चुनने पर ग्राहकों से अतिरिक्त फीस वसूल रही हैं। ये चार्ज उपभोक्ताओं को बिना स्पष्ट जानकारी दिए जोड़े जाते हैं। सरकार का कहना है कि इस तरह के छिपे हुए शुल्क उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और इनकी गहन जांच की जाएगी।

विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह मामला तब चर्चा में आया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूज़र ने फ्लिपकार्ट से जुड़े अपने अनुभव को साझा किया। पोस्ट में बताया गया कि एक ऑर्डर पर कंपनी ने 226 रुपये का अतिरिक्त चार्ज जोड़ा, जिसमें ‘ऑफर हैंडलिंग फीस’, ‘पेमेंट हैंडलिंग फीस’ और ‘प्रोटेक्ट प्रॉमिस फीस’ जैसी मदें शामिल थीं। ग्राहक ने सवाल उठाया कि कंपनी विज्ञापन में दी गई छूट का दावा करने पर ही ‘ऑफर हैंडलिंग फीस’ क्यों ले रही है?
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पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने जोमैटो, स्विगी और जेप्टो जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्मों पर भी इसी तरह के अनुचित चार्जेस लगाने का मुद्दा उठाया, जिससे ऑनलाइन उपभोक्ताओं में नाराज़गी फैल गई।

केंद्रीय मंत्री ने लिया संज्ञान
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Minister Prahlad Joshi) ने खुद इस पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि, ‘ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के खिलाफ ऐसी कई शिकायतें मिली हैं जो कैश-ऑन-डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज वसूल रहे हैं। यह एक ‘डार्क पैटर्न’ की श्रेणी में आता है, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है।’ उन्होंने कहा कि इस पर सरकारी जांच शुरू की जा चुकी है और दोषी पाए जाने वाले प्लेटफॉर्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्यों बढ़ी उपभोक्ता चिंता?
भारत में ऑनलाइन खरीदारी (Online Shopping) लगातार बढ़ रही है, ऐसे में बिलिंग पारदर्शिता उपभोक्ताओं की बड़ी चिंता बन गई है। कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देते हैं, लेकिन कैश ऑन डिलीवरी चुनने पर जुर्माना लगाना ग्राहकों के साथ भेदभाव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति उन उपभोक्ताओं के लिए अनुचित है जो डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देते हैं।
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डार्क पैटर्न क्या है?
‘डार्क पैटर्न’ (Dark Pattern) ऐसी तकनीकें या मूल्य निर्धारण रणनीतियां हैं, जिन्हें ग्राहकों के व्यवहार में हेरफेर करने के लिए डिजाइन किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ प्लेटफॉर्म यह दिखाते हैं कि किसी वस्तु के केवल एक या दो पीस बचे हैं, जिससे ग्राहक जल्दबाजी में खरीदारी करें, जबकि वास्तव में स्टॉक में कई और पीस होते हैं। इसी तरह, ‘ऑफर 10 मिनट में समाप्त’ जैसे नकली समय सीमाएं बनाकर ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए मजबूर किया जाता है।
