Bihar News: बिहार के सारण जिले में स्थित मढ़ौरा चीनी मिल को फिर से चालू करने की दिशा में राज्य सरकार की पहल अब जमीन पर दिखने लगी है। इसी क्रम में तमिलनाडु के निवेशकों की एक टीम ने रविवार को इस बंद पड़ी मिल का निरीक्षण किया।
निवेशकों ने मिल परिसर का दौरा कर वहां की मौजूदा स्थिति और उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के गन्ना किसानों से भी बातचीत की और गन्ना उत्पादन से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
सात निश्चय–3 योजना के तहत हो रही पहल
राज्य सरकार ने सात निश्चय–3 योजना के तहत बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी योजना के अंतर्गत राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू कराने और नई चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित की जाएं, जिससे उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।
तमिलनाडु के एसएनजे ग्रुप ने किया निरीक्षण
मढ़ौरा चीनी मिल के निरीक्षण के लिए तमिलनाडु के एसएनजे ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रतिनिधि पहुंचे थे। इस टीम में कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एस. एन. जयमुरुगन, अध्यक्ष सेल्वा कुमार, उपाध्यक्ष श्री कृष्ण और ग्रुप ऑडिटर बिमलेंद्र मिश्रा शामिल थे।
उन्होंने गन्ना उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर मिल परिसर का निरीक्षण किया और वर्तमान स्थिति का आकलन किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने आसपास के खेतों में जाकर गन्ने की फसल का भी अवलोकन किया।
किसानों से की बातचीत
निरीक्षण के दौरान निवेशकों ने क्षेत्र के किसानों से भी मुलाकात की। किसानों से गन्ना उत्पादन, खेती की स्थिति और उन्हें आने वाली समस्याओं के बारे में चर्चा की गई।
इस बातचीत का उद्देश्य यह जानना था कि अगर मिल दोबारा शुरू होती है तो किसानों को किस तरह का फायदा मिल सकता है और गन्ना उत्पादन को किस तरह बढ़ाया जा सकता है।
ऐतिहासिक रही है मढ़ौरा चीनी मिल
सारण जिले में स्थित मढ़ौरा चीनी मिल का इतिहास काफी पुराना है। इस मिल की स्थापना 1904 में ब्रिटिश सरकार के समय की गई थी। इसे बिहार ही नहीं बल्कि देश की सबसे पुरानी चीनी मिलों में से एक माना जाता है।
हालांकि 1990 के दशक में यह मिल बंद हो गई थी। धीरे-धीरे यहां के सभी उपकरण खराब हो गए और मिल पूरी तरह से निष्क्रिय हो गई।
फिर से खुलने की जगी उम्मीद
राज्य सरकार की पहल और निवेशकों की रुचि के बाद अब एक बार फिर मढ़ौरा चीनी मिल के फिर से शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। अगर यह मिल दोबारा शुरू होती है तो इससे स्थानीय किसानों और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है।
निरीक्षण के दौरान गन्ना विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें सहायक ईख आयुक्त वेदव्रत कुमार और ईख पदाधिकारी कोमर कानन शामिल थे।
उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मढ़ौरा चीनी मिल फिर से चालू होती है तो इससे न केवल गन्ना किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
