Bihar News:जेपी आंदोलन सेनानियों और लोकतंत्र रक्षकों को -मिलेगा पूरा सम्मान, छूटे नाम जोड़ने के लिए बनेगी समिति-सम्राट चौधरी

बिहार
Spread the love

Bihar News:पटना, 25 जून: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जेपी आंदोलन से जुड़े सेनानियों और लोकतंत्र रक्षकों के सम्मान को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के हर सेनानी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को उचित सम्मान दिया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे लोगों के छूटे हुए नाम जोड़ने के लिए एक समिति गठित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा पटना के ज्ञान भवन में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम के दौरान की। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि अर्पित की और जेपी आंदोलन से जुड़े सेनानियों को सम्मानित किया।

आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

सम्राट चौधरी ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता का इतिहास गौरवशाली रहा है, लेकिन लगभग 50 वर्ष पहले देश ने लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात भी देखा था। उन्होंने 25 जून 1975 को लागू आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने की कोशिश की गई थी। इसी स्मृति को जीवित रखने के लिए देशभर में ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र की कीमत को समझ सकें।

लोकतंत्र की रक्षा और संविधान के मूल्यों पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है और उसे जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़ी समस्याओं का सीधा समाधान होना चाहिए और सरकार को लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप काम करना चाहिए।

सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र और बिहार की डबल इंजन सरकार पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

गरीब, किसान, महिला और युवाओं के लिए काम का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के साथ-साथ गरीबों को न्याय, महिलाओं को सम्मान, किसानों को सुरक्षा और युवाओं को बेहतर शिक्षा व रोजगार देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है।

उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि उसने गरीबी हटाने का नारा तो दिया, लेकिन गरीबों की स्थिति नहीं बदल सकी। सम्राट चौधरी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन और बिजली जैसी योजनाओं ने गरीबों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया है।

125 यूनिट मुफ्त बिजली और सौर योजना का जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत राज्य सरकार ने 25 लाख गरीब परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया है।

सम्राट चौधरी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में घर-घर बिजली पहुंचाने का काम हुआ और अब सरकार बिजली राहत को और आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसे गरीब परिवारों के लिए राहत और सुविधा से जोड़कर पेश किया गया।

भोजपुर की घटना पर न्यायिक आयोग का ऐलान

मुख्यमंत्री ने भोजपुर में हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने तत्काल उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग के गठन का फैसला किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ितों को न्याय मिलेगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और कानून व्यवस्था के साथ न्यायिक जवाबदेही दोनों सुनिश्चित की जाएंगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भोजपुर की घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा बनी हुई है।

शिकायत निवारण में देरी पर अधिकारियों को नोटिस की चेतावनी

सम्राट चौधरी ने राज्य सरकार की जवाबदेही प्रणाली का जिक्र करते हुए कहा कि अगर किसी आवेदन का 10 दिनों के भीतर समाधान नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी को नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 20 दिन, 25 दिन और 30 दिन की देरी पर क्रमशः अगली कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब तक लगभग 3 लाख 70 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3 लाख 20 हजार मामलों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि सहयोग शिविरों में स्वतंत्रता सेनानियों और जेपी आंदोलन से जुड़े लोगों के भी आवेदन प्राप्त हुए हैं।

जेपी सेनानियों के छूटे नाम जोड़ने के लिए बनेगी समिति

मुख्यमंत्री ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन के सेनानियों और लोकतंत्र रक्षकों के सम्मान के लिए पहले भी कई फैसले लिए गए हैं और अब इसे और व्यवस्थित रूप दिया जाएगा।

सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि जेपी आंदोलन के ऐसे सेनानी, जो किसी कारणवश अब तक लाभ और सम्मान से वंचित रह गए हैं, उन्हें चिन्हित कर सूची में जोड़ा जाएगा। इसके लिए एक समिति बनाई जाएगी, ताकि छूटे हुए नामों को जोड़ा जा सके और उन्हें सम्मान व सुविधाओं से जोड़ा जा सके।

लोकतंत्र रक्षकों के साथ सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोग केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे देश की लोकतांत्रिक चेतना के जीवित प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ जेपी सेनानियों और लोकतंत्र रक्षकों के साथ खड़ी है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार 25 जून के कार्यक्रम में उन बचे हुए जेपी सेनानियों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिनके नाम अब तक किसी कारणवश छूट गए हैं। इस बयान को सरकार की तरफ से राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों तरह का संदेश माना जा रहा है।

जेपी नड्डा की मौजूदगी से कार्यक्रम को मिला राजनीतिक महत्व

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया। मुख्यमंत्री ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि वे छात्र जीवन से ही लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं और आपातकाल विरोधी आंदोलन से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों का जेपी नड्डा से विशेष आत्मीय संबंध है और उनका बिहार आगमन हमेशा प्रेरणादायी रहा है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और जेपी सेनानी भी मौजूद रहे।

आपातकाल की बरसी पर राजनीतिक संदेश भी साफ

पटना के इस कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने केवल आपातकाल की याद भर नहीं दिलाई, बल्कि इसे लोकतंत्र, जवाबदेही और राजनीतिक विरासत के व्यापक संदेश से भी जोड़ा। एक तरफ उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोला, तो दूसरी तरफ जेपी आंदोलन के सेनानियों के सम्मान और छूटे नामों को जोड़ने की घोषणा कर राजनीतिक और सामाजिक दोनों संकेत दिए।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जेपी आंदोलन सेनानियों के लिए बनने वाली समिति, सम्मान योजना और शिकायत निवारण से जुड़े दावे जमीन पर किस तरह आगे बढ़ते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि बिहार सरकार आपातकाल की बरसी को लोकतांत्रिक विरासत और समकालीन राजनीति—दोनों के मंच के रूप में इस्तेमाल कर रही है।