Bihar News: बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए राज्य स्तर पर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। बिहार लोक भवन में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक सुधार, डिजिटल व्यवस्था, नई भर्ती प्रक्रिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सभी विश्वविद्यालयों में पूरी तरह लागू होगा समर्थ पोर्टल
बैठक में बताया गया कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया पहले से ही समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है।
अब सभी विश्वविद्यालयों को 31 दिसंबर 2026 तक समर्थ पोर्टल के सभी 26 मॉड्यूल पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें वित्त, लेखा, कर्मचारी सेवाएं और अकादमिक प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक खर्च कम होगा और कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी एवं डिजिटल बनेगी।
211 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में होगी केंद्रीकृत भर्ती
बैठक में बताया गया कि नवस्थापित 211 सरकारी डिग्री कॉलेजों में संविदा आधारित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति केंद्रीकृत प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी।
इसके लिए बेहतर वेतनमान और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि योग्य और प्रतिभाशाली शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो सके।
शिक्षकों के प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष जोर
उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रत्येक संस्थान को हर वर्ष कम से कम एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) आयोजित करना अनिवार्य किया जाएगा।
पटना और मुजफ्फरपुर स्थित शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों को भी और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को तेजी से किया जाएगा लागू
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
बताया गया कि सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। साथ ही स्नातकोत्तर के 43 विषयों के नए पाठ्यक्रमों को जुलाई के पहले सप्ताह तक मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है।
शोध को मिलेगा बढ़ावा
राज्य में शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई नई योजनाओं पर सहमति बनी।
इनमें शामिल हैं—
- कुलाधिपति पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप
- मुख्यमंत्री शोध अनुदान योजना
- मुख्यमंत्री शोध छात्रवृत्ति योजना
इन योजनाओं का उद्देश्य शोध को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को अनुसंधान के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
नया विश्वविद्यालय कानून बनाने की तैयारी
बैठक में उच्च शिक्षा के लिए नया और आधुनिक कानून बनाने पर भी चर्चा हुई।
इसके लिए 15 राज्यों के विश्वविद्यालय अधिनियमों का अध्ययन किया गया है। सरकार का उद्देश्य बिहार के विश्वविद्यालयों के लिए ऐसा नया कानून तैयार करना है, जो देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं पर आधारित हो।
लंबित डिग्रियां 30 सितंबर तक देने का लक्ष्य
बैठक में छात्रों की लंबित डिग्रियों के वितरण पर भी विशेष चर्चा हुई।
निर्देश दिए गए कि 30 सितंबर 2026 तक मिशन मोड में सभी लंबित डिग्रियों का वितरण पूरा किया जाए, ताकि छात्रों को नौकरी और आगे की पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
तबादला और पदोन्नति के लिए बनेगी समय-सीमा
शिक्षकों और कर्मचारियों के स्थानांतरण तथा पदोन्नति की प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने का निर्णय लिया गया।
सामान्य तबादले केवल जून महीने में किए जाएंगे। अन्य मामलों में कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
शिकायत निवारण और संस्थागत मूल्यांकन होगा मजबूत
बैठक में समर्थ पोर्टल के माध्यम से शिकायत निवारण और बजट प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।
इसके अलावा उत्कृष्ट संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए कुलाधिपति ट्रॉफी, संस्थागत प्रदर्शन के मूल्यांकन और नियमित कार्यशालाओं के आयोजन जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
शोधार्थियों के लिए बनेगा आधुनिक पुस्तकालय
राज्यपाल ने शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए एक समर्पित आधुनिक पुस्तकालय स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले शोध संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकें।
उच्च शिक्षा को मिलेगा नया स्वरूप
बैठक में राज्यपाल ने कहा कि इन सभी सुधारों से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, डिजिटल और छात्र-केंद्रित बनेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि बिहार के छात्रों को बेहतर उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि इन कदमों से राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
