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Gurugram: द्वारका एक्सप्रेसवे से सफ़र करने वाले ये ख़बर जरूर पढ़ें

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Gurugram News: गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए अहम खबर है।

Gurugram News: गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए अहम खबर है। गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) के नीचे डाली जा रही पेयजल पाइपलाइन का काम विवादों में घिर गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस काम को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया है। एनएचएआई (NHAI) का आरोप है कि गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने बिना मंजूरी लिए एक्सप्रेसवे के नीचे खुदाई शुरू कर दी थी, जिससे सड़क धंसने का खतरा पैदा हो गया। पाइपलाइन डालते समय दो स्थानों पर मिट्टी खिसकने की भी जानकारी मिली है। पढ़िए पूरी खबर…

Pic Social Media

एनएचएआई को मंजूरी के बिना शुरू किया गया काम

आपको बता दें कि एनएचएआई ने कहा कि द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) के निर्माण के दौरान सीपीआर (सेंट्रल पेरिफेरल रोड) के नीचे से निकलने वाली पुरानी वाटर सप्लाई लाइन को शिफ्ट किया गया था। एवीएल-36 सोसाइटी के पास करीब 350 मीटर जमीन विवादित होने के कारण यह लाइन पूरी नहीं डाली जा सकी थी। जीएमडीए की योजना थी कि इस पाइपलाइन के जरिए सेक्टर-58 से लेकर सेक्टर-80 तक पानी की आपूर्ति की जाए। जब कई बार आग्रह के बाद भी एनएचएआई ने अनुमति नहीं दी, तो जीएमडीए ने अपने स्तर पर पाइपलाइन डालने की योजना बना ली।

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8 करोड़ रुपये की परियोजना, अप्रैल में दिया गया था ठेका

जीएमडीए (GMDA) ने अप्रैल माह में एक कंपनी को करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से काम सौंपा। योजना के तहत दो हजार एमएम क्षमता की पाइपलाइन द्वारका एक्सप्रेसवे के नीचे से निकाली जानी थी। विवादित जमीन की जगह एक्सप्रेसवे के दूसरे हिस्से से पाइपलाइन जोड़ने की योजना बनाई गई थी। लेकिन जीएमडीए ने एनएचएआई को इस बारे में सूचित किया था, लेकिन लिखित मंजूरी नहीं ली गई थी। इसके बावजूद ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया।

खिसकी मिट्टी से बढ़ा खतरा, एनएचएआई ने रुकवाया काम

एक्सप्रेसवे के नीचे 5 से 7 मीटर की गहराई पर पाइपलाइन बिछाई जा रही थी। इस दौरान दो जगहों से मिट्टी खिसकने की घटना सामने आई। ऊपर से ट्रैफिक का दबाव बढ़ने के कारण यह खतरा और गंभीर हो गया। जीएमडीए ने तत्काल ठेकेदार की मदद से ग्राउटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर मिट्टी को स्थिर करने की कोशिश की, लेकिन जब एनएचएआई के अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने काम तुरंत रुकवा दिया।

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कई बार लिखा गया पत्र

जीएमडीए के एक अधिकारी ने कहा कि सेक्टर-58 से 80 तक की रिहायशी सोसाइटियों तक पानी पहुंचाना अति आवश्यक है। इसके लिए एनएचएआई को कई बार मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया गया था। अब जब काम रोक दिया गया है, तो जीएमडीए ने औपचारिक मंजूरी के लिए एनएचएआई को आवेदन भेज दिया है।

दो साल से तैयार खड़ा 550 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर

जानकारी के अनुसार, इन सेक्टरों में जलापूर्ति के लिए करीब 550 करोड़ रुपये की लागत से पूरा ढांचा दो साल पहले तैयार हो चुका है। लेकिन पाइपलाइन न जुड़ पाने की वजह से अब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। सेक्टर-72 में 70 करोड़ रुपये की लागत से बूस्टिंग स्टेशन बनाया गया है, जबकि चंदू-बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से सेक्टर-72 तक 176 करोड़ रुपये की पाइपलाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है।

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एनएचएआई ने जताई सुरक्षा चिंता

एनएचएआई (NHAI) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जीएमडीए ने बिना मंजूरी के एक्सप्रेसवे के नीचे खुदाई शुरू की थी, जिससे सड़क की स्थिरता पर खतरा मंडराने लगा। उन्होंने कहा, ‘अगर मिट्टी और ज्यादा खिसकती तो बड़ा हादसा हो सकता था। इसलिए काम रोक दिया गया है। हमने जीएमडीए से पाइपलाइन की पूरी योजना और नक्शे मांगे हैं। तकनीकी समिति की जांच के बाद ही आगे की मंजूरी दी जाएगी।’