UP News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। सरकार द्वारा चलाई गई विभिन्न योजनाओं और अभियानों के कारण न केवल स्कूलों में नामांकन बढ़ा है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
स्कूल चलो अभियान से लाखों बच्चों की स्कूल में वापसी
राज्य में स्कूल चलो अभियान के तहत बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन हुआ। वहीं अप्रैल 2026 में मात्र 20 दिनों के भीतर 8.79 लाख से अधिक नए बच्चों का नामांकन दर्ज किया गया, जो सरकारी स्कूलों के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
सरकार ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सर्वे आधारित रणनीति अपनाई। वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख बच्चों की पहचान की गई, जिनमें से 2.69 लाख बच्चों को सीधे कक्षा-1 में प्रवेश दिया गया और 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षा से जोड़ा गया।
ऑपरेशन कायाकल्प से बदली स्कूलों की तस्वीर
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का विकास किया गया। वर्ष 2017-18 में जहां केवल 36% स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 96.30% हो गया है।
स्कूलों में डेस्क-बेंच, शौचालय, पेयजल, बिजली और सुरक्षित भवन जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए आवासीय विद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है।
छात्रों को मुफ्त सुविधाएं और आर्थिक सहायता
सरकार ने छात्रों और अभिभावकों की आर्थिक परेशानी कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हर वर्ष 1.30 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग और स्टेशनरी के लिए ₹1200 की सहायता दी जाती है।
इसके अलावा कक्षा 1 से 8 तक सभी विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और कार्यपुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे बच्चों की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि बढ़ी है।
मॉडल स्कूल और स्मार्ट क्लास से आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा
प्रदेश में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए 75 जिलों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में लगभग 1500 छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था होगी और कुल 2.25 लाख विद्यार्थी सीधे लाभान्वित होंगे।
शिक्षा को तकनीक से जोड़ने के लिए हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लास और ICT लैब स्थापित की गई हैं।
- 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरित किए गए
- 25,954 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास शुरू
- 8,291 विद्यालयों में नई ICT लैब स्थापित
इन पहलों से शिक्षा प्रणाली अधिक आधुनिक और प्रभावी बनी है।
बालिका शिक्षा और समावेशी शिक्षा पर विशेष ध्यान
सरकार ने बालिकाओं और दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को भी प्राथमिकता दी है।
- 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित
- 87,647 बालिकाएं नामांकित
- दिव्यांग बच्चों के लिए सहायक उपकरण और छात्रवृत्ति उपलब्ध
इससे शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
पीएम पोषण योजना से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर
PM Poshan Scheme के तहत 1.42 लाख विद्यालयों में 1.52 करोड़ विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। साप्ताहिक दूध और फल वितरण से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ है।
इसके साथ ही 3.63 लाख रसोइयों को ₹2000 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जिनमें 93% महिलाएं शामिल हैं। उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए Ayushman Bharat Yojana से भी जोड़ा गया है।
शिक्षामित्रों और कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला
सरकार ने शिक्षा कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि की है। अब शिक्षामित्रों को ₹18,000 और अनुदेशकों को ₹17,000 प्रतिमाह दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों में संरचना, तकनीक, गुणवत्ता और समावेश के स्तर पर व्यापक सुधार देखने को मिला है। यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों की व्यवस्था और बच्चों के भविष्य में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
