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Greater Noida: नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 75 हजार फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत, टेंशन में बिल्डर

ग्रेटर नोएडा- वेस्ट दिल्ली NCR
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Greater Noida: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी खरीदार को फ्लैट का कब्जा मिल चुका है, लेकिन परियोजना अब भी अधूरी है या आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, तो वह बिल्डर के खिलाफ मुआवजे का दावा कर सकता है।

इस फैसले से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के करीब 75 हजार से अधिक फ्लैट खरीदारों को लाभ मिलने की संभावना है, जो वर्षों से अधूरी परियोजनाओं और रजिस्ट्री की समस्या से जूझ रहे हैं।

कब्जा मिलने के बाद भी मुआवजे का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें कहा गया था कि फ्लैट का कब्जा लेने के बाद खरीदार उपभोक्ता (Consumer) नहीं रहता और वह उपभोक्ता मंच पर शिकायत दर्ज नहीं करा सकता।

अब अदालत ने स्पष्ट किया है कि कब्जा मिलने के बावजूद यदि बिल्डर ने परियोजना पूरी नहीं की है या अपने वादों को पूरा नहीं किया है, तो खरीदार मुआवजे की मांग कर सकता है।

अधूरी परियोजनाओं से परेशान हैं हजारों परिवार

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई हाउसिंग परियोजनाओं में खरीदारों को फ्लैट का कब्जा तो दे दिया गया, लेकिन आज भी कई जरूरी सुविधाएं अधूरी हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) का अभाव
  • फ्लैट की रजिस्ट्री लंबित
  • लिफ्ट और पार्किंग की अधूरी व्यवस्था
  • क्लब हाउस और कॉमन सुविधाओं का निर्माण अधूरा
  • बिजली और पानी की स्थायी व्यवस्था का अभाव

इन समस्याओं के कारण हजारों परिवार वर्षों से परेशान हैं।

दोहरा आर्थिक बोझ झेल रहे खरीदार

अधूरी परियोजनाओं के कारण बड़ी संख्या में खरीदारों को एक साथ घर की ईएमआई और किराया दोनों देना पड़ रहा है।

इसका असर केवल आर्थिक स्थिति पर ही नहीं, बल्कि परिवारों के दैनिक जीवन, बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। कई खरीदार वर्षों से रजिस्ट्री और मूलभूत सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।

अब मिलेगा कानूनी आधार

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसे खरीदार अब बिल्डर के खिलाफ उपभोक्ता मंच में जाकर:

  • परियोजना में हुई देरी का मुआवजा,
  • आर्थिक नुकसान की भरपाई,
  • देरी अवधि का ब्याज,
  • और अन्य कानूनी राहत की मांग कर सकते हैं।

यह फैसला उन मामलों में भी राहत देगा जहां बिल्डर केवल कब्जा देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते रहे हैं।

खरीदारों ने फैसले का किया स्वागत

फ्लैट खरीदारों और निवासी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।

नेफोवा (NEFOWA) के अध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि कई बिल्डर केवल पजेशन लेटर देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते थे। अब यह फैसला खरीदारों की कानूनी स्थिति को और मजबूत करेगा।

वहीं सेक्टर-137 स्थित एक सोसायटी के निवासी राहुल श्रीवास्तव का कहना है कि वर्षों से लंबित रजिस्ट्रियों और अधूरी परियोजनाओं से परेशान खरीदार अब मुआवजे की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

हजारों खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से लंबित विवादों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इससे न केवल हजारों खरीदारों को कानूनी राहत का रास्ता मिलेगा, बल्कि बिल्डरों की जवाबदेही भी पहले की तुलना में अधिक तय होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में अधूरी परियोजनाओं और विलंबित सुविधाओं के मामलों में खरीदारों के अधिकारों को और मजबूत करेगा।