बिना तथ्यों और सबूतों के कुछ लोगों ने दबाव बनाने के लिए लगाए तथ्यहीन ठगी के आरोप
पिछले 2 महीनों से पुलिस कर रही मामले की जांच
अभी तक पुलिस को नहीं मिले पत्रकार के खिलाफ पुख्ता सबूत
सबूत नहीं मिलने से पुलिस ने जांच को डाली ठंडे बस्ते पर
Rewa News: पिछले दिनों रीवा के एक पत्रकार पर 1 करोड़ की रकम ठगने का आरोप लगा था जिसके बाद यह खबर सिर्फ आरोपों के आधार रीवा सहित भोपाल तक आग की तरह फैल गई। वजह थी षड्यंत्र करने वाले कुछ पत्रकार भी इसमें शामिल थे और उनका एकमात्र उद्देश्य था कि पत्रकार पर दबाव बनाया जा सके या की पत्रकार को संस्था से निकलवाया जा सके। एक करोड़ की ठगी करने की खबरें स्थानीय अखबारों सहित कई पत्रकारों ने चलाई हालांकि इस बात की किसी ने पुष्टि नहीं की लगाए गए आरोप सही है या सिर्फ मनगढ़ंत।
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शिकायतकर्ता डॉ भानु सिंह की शिकायत पर अमहिया थाना ने शिकायत दर्ज की और दूसरे पक्ष की भी बात सुनकर मामले की जांच में जुट गई। लेकिन खबर चलाने को बेसब्र पत्रकारों ने बिना किसी पुष्टि के आरोपी बताए जा रहे पत्रकार विजय गुप्ता को अपराधी घोषित करते हुए बड़ी हेडलाइन के साथ फोटो लगा कर लंबी चौड़ी खबर लिख डाली जिसका मकसद सिर्फ पत्रकार विजय गुप्ता को बदनाम करना और डॉ भानु सिंह को खुश करने के सिवा कुछ और नहीं था।

विजय गुप्ता न्यूज 18 में बतौर पत्रकार जब से काम शुरू किया तभी से उनके रास्ते में लोगों ने कांटे बिछाने शुरू कर दिए। पत्रकारों का एक धड़ा जो की न्यूज 18 में का पत्रकार बनने का सपना देख रहे थे जब एक नया लड़का विजय गुप्ता न्यूज 18 रीवा में बतौर स्टिंगर बना दिए गए जिसके बाद शुरू हुआ साजिश का दौर पत्रकार बिरादरी में अनजाने दुश्मन तो थे ही उसके अलावा वो भी लोग सीधे तौर पर दुश्मन के तौर पर सामने आए जो कही न कही विजय गुप्ता की बढ़ती मान प्रतिष्ठा से न खुश थे और इन सभी ने मिलकर एक साजिश रची जिसका उद्देश्य था फर्जी मुकदमे में फसाना और बदनाम करना साथ ही न्यूज 18 से बाहर करवाना काफी हद तक साजिशकर्ता सफल भी रहे लेकिन कहते है न सांच को आंच नहीं सत्य की हमेशा जीत होती है और हुआ भी ऐसा और अब धीरे-धीरे वो सारे लोग बेनकाब हो रहे जो इस साजिश में शामिल है और उनके नाम भी जल्द सार्वजनिक होंगे। विजय गुप्ता के खिलाफ अमहिया थाना में डॉ भानु प्रताप ने शिकायत दर्ज कराई है जिसको करीब दो माह से ज्यादा का समय हो गया लेकिन अभी तक पुलिस की जांच पूरी नहीं हुई है क्योंकि पूरा का पूरा मामला ही फर्जी है और शिकायत कर्ता ने कोई ऐसे सबूत नहीं दिए जिससे यह सिद्ध हो कि उसके साथ 1 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ है।


आरोपी बताए जा रहे विजय गुप्ता का जब इस मामले की जानकारी हुई तो उसने भी एसपी को शिकायत कर पूरे मामले की जांच निष्पक्ष कराने की मांग की और संबंधित लेन देन से जुड़े सारे दस्तावेज पुलिस को सौंपे लेकिन कुछ स्थानीय पुलिस कर्मी भी इस साजिश में शामिल थे जिन्होंने शिकायतकर्ता का साथ दिया और विजय गुप्ता को फसाने कूट रचित दस्तावेज तैयार किया। विजय गुप्ता ने जो बयान थाने में दिया था उसमें पुलिस ने चार लाईन स्वयं ही जोड़ दिए और यह दिखाने का प्रयास किया की विजय गुप्ता आरोपी है और उसने गुनाह कबूल करते हुए 6 माह में रुपए वापस करने की बात कही है विजय गुप्ता ने पुलिस के इस कूट रचना को भी लिखित शिकायत एसपी से की है जिसकी भी जांच की जा रही है कुल मिलाकर फर्जी मामले को पुलिस के साथ मिलकर सही बनाने के प्रयास किया गया।

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कुछ गौर करने वाली बातें
- शिकायत कर्ता डॉ भानु प्रताप जो पेशे से चिकित्सक है और पढ़े लिखे इंसान भी लगते है उन्होंने एक करोड़ रुपए की इतनी बड़ी राशि बिना किसी लिखा पढ़ी के कैसे दे दी और साथ ही उसका कोई हिसाब किताब है तो आज दिनांक तक पेश क्यों नहीं कर पाए।
- दूसरा डॉ भानु प्रताप सिंह कई वर्षों से भोपाल में रह रहे है अचानक उन्हें अपने पैसे की याद कैसे आई और रीवा आ कर उन्होंने शिकायत दर्ज करा दी।
- तीसरी बात पुलिस को आरोपी बनाए गए विजय गुप्ता के बयान में छेड़खानी करने की क्या जरूरत पड़ गई और जो दस्तावेज पुलिस के इन्वेस्टिगेशन का अहम हिस्सा है उसे वायरल क्यों किया गया और किसने किया।
- चौथी बात पुलिस को इस मामले की जांच में देरी क्यों लग रही जबकि आरोपी बनाए गए विजय गुप्ता ने संबंधित सारे दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध करा दिए है पुलिस अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच करे तो साजिश करने वाले कई पत्रकार और विजय गुप्ता के करीबी बेनकाब हो जाएंगे।
Disclaimer: खबरी मीडिया को भेजे गए पत्र पर आधारित खबरी मीडिया खबर की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
