अब लगेगा 5 से 30 हजार रुपये तक जुर्माना
Punjab News: पंजाब सरकार (Punjab Government) ने पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। इस बार गांवों को पिछले पराली जलाने (Stubble Burning) के मामलों के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटकर नई रणनीति तैयार की गई है। सभी जिलों को 1 अगस्त 2025 तक गांवों की पहचान, जोखिम आकलन और कार्रवाई योजना पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…

पंजाब सरकार (Punjab Government) ने जुर्माने की राशि बढ़ाकर 2 एकड़ से कम जमीन पर 5 हजार रुपये, 2 से 5 एकड़ पर 10 हजार रुपये और 5 एकड़ से अधिक पर 30 हजार रुपये प्रति घटना तय की है। बार-बार उल्लंघन करने वालों या जुर्माना न भरने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत FIR दर्ज की जाएगी।
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नई SOP के तहत सख्त दिशा-निर्देश
स्पेशल डीजीपी द्वारा जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, गांवों को पराली जलाने की घटनाओं के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। 30 से अधिक घटनाओं वाले गांवों को ‘अत्यधिक जोखिम’, 10 से 30 घटनाओं वाले को ‘मध्यम जोखिम’ और 1 से 10 घटनाओं वाले को ‘कम जोखिम’ श्रेणी में रखा गया है। इनके आधार पर जागरूकता अभियान, निगरानी और प्रवर्तन की रणनीति लागू की जाएगी। SOP के तहत पराली जलाने की सूचना मिलने पर 48 घंटे में फील्ड जांच, 7 कार्यदिवसों में चालान जारी करना और 15 दिनों में जुर्माना वसूलना अनिवार्य है।
विभागों का समन्वय और जिम्मेदारी
पंजाब सरकार (Punjab Government) ने राजस्व, कृषि और पर्यावरण विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। राजस्व विभाग फील्ड जांच, चालान जारी करने और जुर्माना वसूली की जिम्मेदारी संभालेगा। कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने और पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देगा। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) निगरानी, सैटेलाइट डेटा विश्लेषण और रिपोर्टिंग करेगा। PPCB के फील्ड स्टाफ को सैटेलाइट डेटा पढ़ने, चालान प्रक्रिया और जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
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CAQM की ‘शून्य सहनशीलता’ नीति
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की 3 जुलाई 2025 को हुई बैठक में पराली जलाने पर ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति पर जोर दिया गया। आयोग के चेयरपर्सन ने कहा कि गांव-स्तरीय निगरानी, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और तकनीक-आधारित रणनीति के जरिए पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब सरकार का लक्ष्य तकनीकी निगरानी, कड़े जुर्माने और जागरूकता के जरिए दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करना है।
