Punjab News

Punjab News: 15 अगस्त से पंजाब के सरपंचों को मिलेगा 10,000 रुपये मानदेय, भगवंत मान बोले- गांवों की तरक्की ही राज्य के विकास की सबसे मजबूत नींव

पंजाब
Spread the love

Punjab News:बठिंडा, 24 जून: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने और गांवों की नेतृत्व क्षमता को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की कि 15 अगस्त से पंजाब के सरपंचों को 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। अभी तक यह मानदेय 2,000 रुपये प्रति माह था।

बठिंडा में आयोजित सरपंच मिलनी के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरपंच दिन-रात गांवों की सेवा करते हैं और अपने समर्पण के लिए सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि गांवों के नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

पांच गुना बढ़ा मानदेय, 15 अगस्त से होगा लागू

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार ने सरपंचों के मानदेय में पांच गुना बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त से राज्य के हर सरपंच को 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलेगा।

मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने भी सरपंचों को मानदेय देने के वादे किए थे, लेकिन वे उन्हें पूरा नहीं कर सकीं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने पहले 2,000 रुपये मानदेय सुनिश्चित किया और अब इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

‘सरपंच लोकतंत्र की पहली सीढ़ी हैं’

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की पहली और सबसे मजबूत इकाई हैं। उनके मुताबिक, गांवों के फैसले और विकास की दिशा तय करने में सरपंचों की भूमिका बेहद अहम होती है और इसी वजह से उन्हें मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है, इसलिए पंचायती राज संस्थाओं को लोकतंत्र का आधार माना जाता है। सरकार की योजनाएं तभी असरदार बनती हैं, जब उन्हें गांव स्तर पर सही ढंग से लागू किया जाए।

गांवों की तरक्की को पंजाब के विकास से जोड़ा

भगवंत मान ने कहा कि जब गांव तरक्की करेंगे, तभी पंजाब सही मायने में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि गांवों का विकास ही खुशहाल और रंगला पंजाब के निर्माण की असली कुंजी है।

मुख्यमंत्री ने सरपंचों से अपील की कि वे अपने गांवों के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि गांव मजबूत होंगे तो राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

ग्रामीण विकास के लिए फंड की कमी नहीं: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि ग्रामीण विकास के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांवों के विकास कार्यों के लिए लगातार ग्रांट जारी कर रही है और आगे भी करती रहेगी।

हालांकि, इसके साथ उन्होंने साफ किया कि टैक्सदाताओं के एक-एक पैसे का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उन्होंने सरपंचों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि जनता के पैसे का इस्तेमाल सिर्फ जनहित के कामों पर हो।

सरपंचों से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपील

भगवंत मान ने कहा कि सरपंचों का नैतिक दायित्व है कि वे विकास कार्यों की खुद निगरानी करें और हर खर्च को जवाबदेही के साथ अंजाम दें। उन्होंने कहा कि पंचायतों के जरिए चलने वाले प्रोजेक्ट सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, इसलिए इनमें लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में बनने वाले विकास प्रोजेक्ट्स की निगरानी सरपंचों को गंभीरता से करनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि पंचायतें मजबूत और जवाबदेह होंगी तो ग्रामीण विकास की रफ्तार अपने आप तेज होगी।

गुटबाजी से दूर रहने की सलाह

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरपंचों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वे गांवों के विकास में किसी तरह की नाजायज दखलअंदाजी या गुटबाजी से दूर रहें। उन्होंने कहा कि अतीत में कई गांवों के विकास कार्य आपसी खींचतान और गुटबाजी की वजह से प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि एक बार चुने जाने के बाद सरपंच सिर्फ अपने समर्थकों का नहीं, बल्कि पूरे गांव का प्रतिनिधि होता है। इसलिए उसे हर व्यक्ति के साथ बराबरी का व्यवहार करना चाहिए और निष्पक्ष फैसले लेने चाहिए।

नशा मुक्त गांव और भाईचारे पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने सरपंचों से कहा कि वे गांवों को नशा मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाना और गांवों में जागरूकता बढ़ाना पंचायतों की बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव, शांति और भाईचारे को मजबूत करने की भी अपील की। मान ने कहा कि गांवों में सामाजिक एकता और शांति बनी रहेगी, तभी विकास की रफ्तार टिकाऊ होगी।

‘सरपंच सरकार और गांव के बीच पुल हैं’

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करते हैं। उनके मुताबिक, ग्रामीण पंजाब के विकास और बदलाव में पंचायतों की भूमिका सबसे ज्यादा अहम है।

उन्होंने कहा कि गांव स्तर की समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने के लिए सरपंच मिलनी जैसी पहल जरूरी है। इससे सरकार को सीधे फीडबैक मिलता है और योजनाओं को जमीनी जरूरतों के हिसाब से बेहतर बनाया जा सकता है।

विकास कार्यों में लाइब्रेरी, स्कूल और सोलर लाइट को प्राथमिकता देने की सलाह

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में आने वाले फंड का इस्तेमाल सिर्फ पारंपरिक निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरपंचों से अपील की कि वे लाइब्रेरी, स्कूलों के निर्माण, सोलर लाइट और दूसरे दीर्घकालिक जनहित के कामों को प्राथमिकता दें।

मान ने कहा कि गांवों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब बुनियादी सुविधाओं के साथ शिक्षा और आधुनिक ढांचे पर भी बराबर ध्यान दिया जाए। उन्होंने साफ किया कि सरकार ऐसे हर प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देगी जो गांवों के भविष्य को मजबूत करे।

‘ईमानदार सरपंच गांव के विकास की रीढ़’

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदार और समर्पित सरपंच गांव के विकास की रीढ़ होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के समय गांवों की ग्रांटों में भी हिस्सेदारी और हस्तक्षेप की राजनीति होती थी, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते थे।

मान ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों तक पहुंचने वाला पैसा सही जगह और सही उद्देश्य के लिए खर्च हो। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पंजाब के गांवों का बड़ा कायाकल्प देखने को मिलेगा।

रंगला पंजाब के लिए पंचायतों को बताया अहम

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरपंचों को रचनात्मक पहलकदमियों के जरिए अपने गांवों का नक्शा बदलने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि गांवों को साफ-सुथरा, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में विशेष प्रयास किए जाएं।

उन्होंने कहा कि पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए गांवों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास और लोगों की खुशहाली के लिए पंचायतों को पूरा सहयोग देती रहेगी।

सरपंच मानदेय बढ़ोतरी के जरिए गांवों पर बड़ा फोकस

बठिंडा की इस सरपंच मिलनी में मुख्यमंत्री भगवंत मान का संदेश साफ रहा कि पंजाब सरकार अब गांवों के नेतृत्व और पंचायत ढांचे को अधिक मजबूत करने पर जोर दे रही है। सरपंचों के मानदेय में पांच गुना बढ़ोतरी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ग्रामीण विकास, पारदर्शी फंड उपयोग और पंचायतों की सक्रिय भागीदारी को लेकर सरकार के ये दावे जमीन पर कितना असर दिखाते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पंजाब सरकार गांवों को अपनी विकास राजनीति के केंद्र में रखने की कोशिश कर रही है।