Punjab News: नशे के खिलाफ पंजाब की नई पहल, पुस्तकालय बन रहे युवाओं की उम्मीद

पंजाब
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Punjab News: चंडीगढ़, 19 जून 2026। पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत एक अनोखी और प्रभावी पहल सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने सरकारी नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में पुस्तकालयों को मजबूत बनाकर नशे से उबर रहे युवाओं को नई दिशा देने का काम शुरू किया है। ये पुस्तकालय अब केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि नई जिंदगी की उम्मीद और आत्मविश्वास का केंद्र बनते जा रहे हैं।

नशा मुक्ति केंद्रों में तैयार हो रहा ज्ञान का वातावरण

पंजाब के विभिन्न सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में धार्मिक ग्रंथ, सिख इतिहास, साहित्य, कविता, जीवनी, पंजाबी संस्कृति और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से मरीजों को पढ़ने की आदत विकसित करने, सकारात्मक सोच अपनाने और मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिल रही है।

यह पहल ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ के तहत चलाई जा रही है। इस कार्यक्रम से जुड़े फेलोज़ अब तक 10 जिलों के सरकारी केंद्रों में पुस्तकालयों की स्थापना और संचालन में सहयोग कर चुके हैं। वर्ष 2026 के अंत तक 80 प्रतिशत से अधिक नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों तक इस कार्यक्रम को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

किताबें कम कर रही हैं नशे की तलब

बठिंडा के सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में पुस्तकालय उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यहां मरीज खाली समय में किताबें पढ़ते हैं और आपस में उन कहानियों पर चर्चा भी करते हैं, जिनमें उन्हें अपने जीवन की झलक दिखाई देती है।

काउंसलर सोमा के अनुसार, पहले केंद्र में कोई पुस्तकालय नहीं था। पुस्तकालय बनने के बाद मरीजों का ध्यान नशे से हटकर किताबों की ओर जाने लगा। कहानियां, कविताएं और आत्मकथाएं विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। पढ़ने की आदत मरीजों को शांत बनाती है और वे काउंसलिंग सत्रों में भी अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने लगते हैं।

होशियारपुर से बठिंडा तक दिख रहा सकारात्मक असर

होशियारपुर के नशा मुक्ति केंद्र में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संदीप कुमारी ने बताया कि वर्ष 2016 में घरों से किताबें लाकर पुस्तकालय की शुरुआत की गई थी। धीरे-धीरे मरीजों ने पढ़ने में रुचि दिखानी शुरू की और प्रेरणादायक पुस्तकों ने उनके जीवन में बदलाव लाने में मदद की।

केंद्रों में सिख धर्म, अध्यात्म, महान व्यक्तियों की जीवनियां और नशा विरोधी साहित्य सबसे अधिक पढ़े जा रहे हैं। कई मरीज उन लोगों की कहानियों से प्रेरणा लेते हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की।

मरीजों को मिल रही नई प्रेरणा

बठिंडा केंद्र में उपचार करा रहे परमिंदर सिंह (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें सिख इतिहास और आत्मकथाएं पढ़ना पसंद है। उनका कहना है कि संघर्ष से सफलता तक की कहानियां उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। वहीं मलेरकोटला के बलदेव सिंह ने बताया कि पढ़ाई ने उन्हें उनकी पुरानी अच्छी आदतों से दोबारा जोड़ दिया है और अब वे अपने लक्ष्य पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।

नई जिंदगी की ओर बढ़ रहे कदम

काउंसलरों का कहना है कि जो मरीज शुरुआत में किताबों में रुचि नहीं लेते, वे भी धीरे-धीरे पढ़ने की आदत विकसित कर लेते हैं। वे किताबों का आदान-प्रदान करते हैं, चर्चा करते हैं और सकारात्मक सोच की ओर बढ़ते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत यह पहल नशे से जूझ रहे लोगों के जीवन में नई उम्मीद, आत्मविश्वास और बदलाव की कहानी लिख रही है।