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Punjab News: सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क से लाखों लोगों को मिल रहा लाभ : डॉ. बलजीत कौर

पंजाब
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Punjab News: पंजाब सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे को और मजबूत करते हुए 5.2 लाख से अधिक नए लोगों को सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क में शामिल किया है। यह जानकारी राज्य की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है।

महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए ‘नवी दिशा योजना’

पंजाब सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दे रही है। ‘नवी दिशा योजना’ के तहत राज्य के 27,314 आंगनवाड़ी केंद्रों में महिलाओं को हर महीने 9 सैनिटरी पैड मुफ्त दिए जा रहे हैं।

अब तक इस योजना के तहत 13.65 लाख महिलाओं को 7.37 करोड़ से अधिक सैनिटरी पैड वितरित किए जा चुके हैं, जिससे मासिक स्वच्छता और महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा मिला है।

मातृत्व सहायता योजनाओं से महिलाओं को लाभ

राज्य में मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इस योजना में पहले बच्चे के लिए ₹5,000 और दूसरे बच्ची के जन्म पर ₹6,000 की सहायता दी जाती है।

पंजाब में इस योजना के तहत 4.22 लाख से अधिक लाभार्थी दर्ज किए गए, जो केंद्र सरकार के तय लक्ष्य से काफी अधिक हैं।

आंगनवाड़ी केंद्रों को बनाया जा रहा शिक्षा का केंद्र

सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण केंद्र ही नहीं बल्कि शुरुआती शिक्षा के केंद्र के रूप में भी विकसित कर रही है।

पोषण भी पढ़ाई भी” अभियान के तहत 8,600 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 12,000 से ज्यादा का प्रशिक्षण जारी है। इससे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बच्चों की सुरक्षा और गोद लेने की प्रक्रिया में सुधार

सरकार ने कमजोर और जरूरतमंद बच्चों के लिए भी कई कदम उठाए हैं।

  • 11,000 से अधिक बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना के तहत हर महीने ₹4,000 की सहायता दी जा रही है।
  • राज्य में 16 नई सरकारी गोद लेने वाली एजेंसियां स्थापित की गई हैं।
  • अब तक 164 बच्चों को गोद लिया जा चुका है, जिससे उन्हें नया परिवार और बेहतर भविष्य मिल सका है।

बाल विवाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई

पंजाब सरकार ने बाल विवाह के मामलों को रोकने के लिए भी अभियान चलाया है। पिछले चार वर्षों में 165 में से 150 मामलों को रोका गया, जबकि बाकी मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई और पीड़ितों को परामर्श व पुनर्वास सहायता दी गई।